रैगिंग मामले में दो छात्र बर्खास्त
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क्या है सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन
- उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी रैगिंग कमेटी होनी चाहिए।
- कमेटी में अध्यापक, अभिभावक, वरिष्ठ व फ्रेशर छात्र के साथ नॉन टीचिंग फैकल्टी भी होनी चाहिए।
- यूजीसी की ओर से जारी एंटी रैगिंग नियमों का नहीं करने पर संस्थान की मान्यता रद्द हो सकती है।
- संस्थान को प्रोस्पेक्टस के माध्यम से रैगिंग गैर कानूनी है के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
- छात्रों को एंटी रैगिंग कमेटी के फोन नंबर और उससे जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
- रैगिंग के आरोप पर छात्र को कॉलेज से बर्खास्त किया जाना चाहिए। पुलिस को भी सूचित किया जाना चाहिए।
रैगिंग के लिए सजा
- संस्थान से बर्खास्त किया जा सकता है।
- स्कॉलरशिप सहित अन्य सुविधाओं पर रोक लग सकती है।
- परीक्षाओं में बैठने से वंचित किया जा सकता है।
- परिणाम रोका जा सकता है।
- किसी अन्य संस्थान में प्रवेश पर रोक लगाई जा सकती है।
- 25 हजार और इससे अधिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- रैगिंग के अपराध की प्रवृत्ति को देखते हुए सजा।
मामला मारपीट का: प्रबंधन
नोएडा में मारपीट करने और एमएमएस बनाने वाले छात्रों को संस्थान ने तुरंत
बर्खास्त कर दिया है। साथ ही इस मामले की एंटी रैगिंग कमेटी से जांच कराई।
मारवाह स्टूडियो के एमडी संदीप मारवाह ने बताया कि जिनके बीच मारपीट हुई,
वह छात्र दोस्त थे। जांच के बाद दोषी छात्रों को बर्खास्त कर दिया। साथ ही
पीड़ित छात्र को उसके घर भेज दिया गया था।
उन्होंने कहा कि ये रैगिंग का
नहीं, आपसी मारपीट का मामला है। रैगिंग के लिए कड़ी सजा होने के बावजूद रह रहकर रैगिंग की खबरें बाहर आती ही रहती हैं। इसलिए हमने रैगिंग और इसकी सजा को लेकर एक स्पेशल रिपोर्ट तैयार की है, जिन्हें आप अगली स्लाइड्स में देख सकते हैं।