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जामिया के दो नैनोसाइंस शोधकर्ताओं का पीएम रिसर्च फेलोशिप में चयन

Sat, 07 Nov 2020 11:56 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Sat, 07 Nov 2020 11:56 AM IST
सार

  • कुलपति ने दोनों छात्राओं को दी बधाई
  • दोनों को पांच साल में मिलेंगे कुल दस लाख

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Two Nanos researchers of Jamia selected in PM Research Fellowship
जामिया मिल्लिया इस्लामिया - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप नियम में बदलाव होने के चलते जामिया मिल्लिया इस्लामिया की दो नैनो साइंस शोधकर्ताओं को भी अनुसंधान करने का मौका मिल रहा है। विश्वविद्यालय श्रेणी जुड़ने के चलते पहले बैच में जामिया के सेंटर फॉर नैनोसाइंस और नैनो टेक्नोलॉजी (सीएनएन) की दो रिसर्च स्कॉलर, मारया खान और अबगीना शाबिर को प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (पीएमआरएफ) में चयन हुआ है। दोनों शोधकर्ताओं का चयन पीएमआरएफ की मई -2020 ड्राइव के लैटरल एंट्री श्रेणी में हुआ है।
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जामिया के सेंटर फॉर नेनो साइंस एंड नैनो टेक्नॉलॉजी के ऑफिशियेटिंग डायरेक्टर डॉ. औरंगजेब खुर्रम हाफिज ने बताया कि पीएमआरएफ के तहत दोनों शोधकर्ताओं को फ़ेलोशिप के तौर पर पहले दो साल तक 70-70 हजार,तीसरे और चौथे वर्ष में 75-75 हजार रुपये और पांचवें वर्ष में 80 हजार रुपये मिलेंगे। यानी पांच साल के लिए कुल 10 लाख रुपये मिलेंगे।
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वहीं, कुलपति प्रो नजमा अख्तर ने दोनों शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि यह विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों में अनुसंधान में अच्छा करने का हौसला बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि जामिया लगातार उत्कृष्टता की बढ़ने के लिए कटिबद्ध है और मेहनत करने वाले अपने छात्रों के बुलंदियां पाने के लिए हरसंभव मदद देने को प्रतिबद्ध है।
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पारंपरिक बैटरी के बजाय नई तकनीक पर होगा काम:
मारया खान ने बताया कि वह पीएचडी में बहुक्रियाशील हाइब्रिड नैनोमीटर आधारित बायोसेंसर पर काम करेगी। इसका मकसद मल्टीफंक्शनल हाइब्रिड नैनोमटेरियल्स को संश्लेषित करना है, ताकि विभिन्न जैविक संवेदी उपकरणों के विकास के लिए उनका इस्तेमाल किया जा सके। 


वहीं, प्रो एसएस की देखरेख में नैनो टेक्नोलॉजी में पीएडी कर रहीं अबगीना शाबिर ने बताया कि पीएचडी में ली-आयन बैटरियों के लिए हाई परफार्मेंस एनोड के निर्माण करना होगा। शोध कार्य के माध्यम से वह उच्च विशिष्ट क्षमता वाली एनोड सामग्री को सुस्पष्ट और स्केलेबल तकनीकों का उपयोग करके संश्लेषित करना चाहती हैं। वहा चाहती हैं कि उनके इस शोध के जरिए पांरपरिक बैटरियों की सीमाएं टूटें जिससे कि उच्च ऊर्जा की मांग पूरी हो सके।
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