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Delhi NCR News: आईएसआईएस से जुड़े होने के दो आरोपी आठ साल बाद बरी
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- पटियाला हाउस कोर्ट ने यूएपीए के मामले में सुनाया फैसला
- कश्मीर निवासी जमशेद ज़हूर पॉल और परवेज राशिद लोन को दिल्ली पुलिस ने किया था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत ने गुरुवार को यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) और आर्म्स एक्ट के तहत आईएसआईएस से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार दो कश्मीरी युवकों जमशेद ज़हूर पॉल और परवेज राशिद लोन को बरी कर दिया। दोनों आरोपियों ने लगभग 8 साल जेल में बिताए। मामले में अभियोजन पक्ष आईएसआईएस सदस्यता, आतंकी साजिश या गतिविधियों को साबित करने में पूरी तरह असफल रहा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित बंसल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस के सबूतों में गंभीर खामियां हैं। कोर्ट ने हथियार बरामदगी की प्रक्रिया पर भी संदेह जताया। एफआईआर में असंगतियां और जांच प्रक्रिया में कई कमजोरियां पाई गईं। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से पहले दोनों के आतंकी संगठन से जुड़े होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें यूएपीए की धारा 18 और 20 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत बरी किया जाता है।
यह मामला 6 सितंबर 2018 का है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जामा मस्जिद और लाल किले के पास खुफिया सूचना के आधार पर दोनों को हथियारों और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया था।
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हाईकोर्ट ने भी यूएपीए मामले में दो आरोपियों को जमानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यूएपीए के एक अन्य मामले में दो आरोपियों हरिस निसार लंगू और जामिन आदिल भट को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि आरोपियों ने चार साल से अधिक की हिरासत झेल ली है और उनकी भूमिका सीमित होने के कारण निरंतर हिरासत न्याय के हित में नहीं है।
दोनों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अक्टूबर 2021 में गिरफ्तार किया था। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के 2023 के जमानत इन्कार के आदेश को पलट दिया।
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- कश्मीर निवासी जमशेद ज़हूर पॉल और परवेज राशिद लोन को दिल्ली पुलिस ने किया था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत ने गुरुवार को यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) और आर्म्स एक्ट के तहत आईएसआईएस से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार दो कश्मीरी युवकों जमशेद ज़हूर पॉल और परवेज राशिद लोन को बरी कर दिया। दोनों आरोपियों ने लगभग 8 साल जेल में बिताए। मामले में अभियोजन पक्ष आईएसआईएस सदस्यता, आतंकी साजिश या गतिविधियों को साबित करने में पूरी तरह असफल रहा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित बंसल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस के सबूतों में गंभीर खामियां हैं। कोर्ट ने हथियार बरामदगी की प्रक्रिया पर भी संदेह जताया। एफआईआर में असंगतियां और जांच प्रक्रिया में कई कमजोरियां पाई गईं। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से पहले दोनों के आतंकी संगठन से जुड़े होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें यूएपीए की धारा 18 और 20 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत बरी किया जाता है।
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यह मामला 6 सितंबर 2018 का है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जामा मस्जिद और लाल किले के पास खुफिया सूचना के आधार पर दोनों को हथियारों और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया था।
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हाईकोर्ट ने भी यूएपीए मामले में दो आरोपियों को जमानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यूएपीए के एक अन्य मामले में दो आरोपियों हरिस निसार लंगू और जामिन आदिल भट को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि आरोपियों ने चार साल से अधिक की हिरासत झेल ली है और उनकी भूमिका सीमित होने के कारण निरंतर हिरासत न्याय के हित में नहीं है।
दोनों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अक्टूबर 2021 में गिरफ्तार किया था। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के 2023 के जमानत इन्कार के आदेश को पलट दिया।