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पांच साल बाद होगा पूरा जुड़वां भाईयों का आधा-अधूरा कपाल, एम्स ने कई अहम खुलासे किए

Sat, 07 Sep 2019 06:26 AM IST
Trainee Trainee परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 07 Sep 2019 06:26 AM IST
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twin bothers rare medical case in aiims 
जग्गा और बलिया - फोटो : अमर उजाला
दो साल दो माह बाद जुड़वां भाई जग्गा और बलिया शुक्रवार शाम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से ओडिशा के लिए भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस से रवाना हुए। इससे पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने इन दोनों भाइयों के ऐतिहासिक केस के बारे में कई अहम खुलासे किए। साथ ही इन दोनों भाइयों का इलाज करते-करते डॉक्टरों ने तीन बड़ी रिसर्च भी कर डालीं।
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जग्गा और बलिया के सिर खोपड़ीनुमा हेलमेट से कवर हैं, क्योंकि इनके सिर में हड्डी नहीं है। त्वचा और धमनियों को जोड़ते हुए इनके सिर को सामान्य आकार देने का प्रयास किया है। डॉक्टरों के अनुसार, पांच साल बाद ये दोनो भाई वापस एम्स आएंगे और तब ऑपरेशन के जरिए इनके सिर में हड्डियां लगाई जाएंगी।
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इसी दौरान बलिया के विजन को लेकर भी डॉक्टर आगे का फैसला लेंगे। एम्स के वरिष्ठ डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि अभी जग्गा और बलिया का सिर हेलमेट से कवर है। कपाल में हड्डी न होने के कारण इन्हें सतर्कता भी काफी बरतनी होगी।
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इस बारे में परिजनों को बता दिया है। चूंकि अभी बलिया पूरी तरह से होश में नहीं है, इसलिए कुछ वर्ष बाद ही सिर में हड्डियां लगाने के लिए ऑपरेशन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हेलमेट आमतौर पर वाहन चालकों द्वारा इस्तेमाल जैसा ही है, हालांकि इसके आकार का अंतर है। 

एम्स द्वारा की गई रिसर्च 

रिसर्च 1 : वीनस बाईपास का नया तरीका भी खोजा

एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि जग्गा और बलिया के जरिये उन्होंने वीनस (मस्तिष्क की धमनियां) बाईपास का नया तरीका भी खोज लिया है। आमतौर पर जिस तरह ओपन हार्ट सर्जरी में धमनियों को जोड़ा जाता है, ठीक उसी तरह वीनस बाईपास में भी ऐसा होता है। चूंकि जग्गा और बलिया सिर से जुड़े थे। इनकी धमनियां भी एक थीं, इसलिए ब्लड लॉस को ध्यान में रखते हुए वीनस बाईपास किया
था, जोकि अब एम्स के लिए एक नई रिसर्च बन चुका है।

रिसर्च 2 : प्लास्टिक प्लेट से सीखा त्वचा को बचाना

एम्स के बर्न व प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष ने बताया कि जग्गा और बलिया के ऑपरेशन के बाद उनके सिर को सामान्य आकार देना बड़ी चुनौती थी। इन बच्चों का कई बार प्लास्टिक सर्जरी के तहत ऑपरेशन किया। सिर में त्वचा लगाई। ऑपरेशन के दौरान ये त्वचा न सिकुड़ जाए, इसलिए प्लास्टिक प्लेट का इस्तेमाल किया गया। अभी तक इस तरह की प्लेट का इस्तेमाल कभी भी नहीं हुआ है, इसलिए जल्द ही वे इस अध्ययन को इंटरनेशनल प्लास्टिक सर्जरी जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजने वाले हैं।

रिसर्च 3 : दिमाग के 3डी मॉडल में नसें भी मौजूद

डॉ. दीपक गुप्ता बताते हैं कि इस केस में सबसे बड़ी मदद 3डी मॉडल से मिली। पहली बार दिमाग के 3डी मॉडल में नसों तक का इस्तेमाल किया गया था, ताकि ये पता चले कि टीम को किस स्तर तक काम करना है। इस मॉडल पर दो बार प्रैक्टिस में ही डॉक्टरों को 3 महीने लग गए थे। इस नई रिसर्च के बाद एम्स गंभीर केस में इसका इस्तेमाल करेगा।

ये दुनिया का सबसे दुर्लभ केस

जग्गा और बलिया की तरह दुनिया भर में साल 1912 से लेकर अब तक 116 केस सामने आए हैं जिनमें से महज 15 ही जीवित हैं। हालांकि इनमें भी जग्गा और बलिया का केस सबसे ज्यादा दुर्लभ है। 9 अप्रैल 2015 को ओडिशा के आदिवासी क्षेत्र कंधमल में जन्म लेने के बाद से ही ये दोनों भाई अपनी मां के दूध से दूर रहे। दोनों भाइयों के सिर जुड़ने के कारण इन्हें जब 14 जुलाई 2017 को
दिल्ली एम्स लाया गया, तो डॉक्टरों को इलाज की रिसर्च में 6 महीने लग गए।

21 जुलाई 2017 को इन्हें पहली बार 9 घंटे 50 मिनट के लिए एनेस्थिसिया (बेहोशी) दिया, ताकि इनका सीटीए और एमआरआई हो सके। इसके बाद 28 अगस्त 2017 को 25 घंटे का एनेस्थिसिया दिया। 28 सितंबर 2017 को 7 घंटे, 25 अक्तूबर 2017 को 14 घंटे 15 मिनट जग्गा तो 16 घंटे बलिया को बेहोश रखा गया। 


इसके अलावा 5 से 8 बार त्वचा ग्राफ्टिंग के लिए भी बेहोश करना पड़ा। 28 अगस्त 2017 को हुए पहले ऑपरेशन में 25 घंटे लगे, जबकि 25 अक्तूबर 2017 को दूसरे ऑपरेशन में 20 घंटे लगे। 33 वरिष्ठ डॉक्टर, 42 रेजीडेंट, 50 नर्स व पैरामेडिकल स्टाफ सहित 125 सदस्यों की टीम इलाज में लगी रही।
 
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