उपहार अग्निकांड: रोंगटे खड़े कर देने वाली है 20 साल बाद की सच्चाई
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उपहार अग्निकांड को 20 वर्ष हो गए, लेकिन पीड़ित परिवारों को आज भी पूरी तरह इंसाफ नहीं मिल पाया। यह दुर्भाग्य ही है कि मुख्य मामले का निपटारा होने में साढ़े 19 वर्ष लग गए, तो इसी से जुड़े तीन अन्य मामले अभी भी अदालत में विचाराधीन हैं।
उपहार घटना पीड़ित एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलम कृष्ण मूर्ति का कहना है कि अब तो कानून के प्रति उनका विश्वास डगमगाने लगा है। अधिकांश सदस्य मायूस हैं कि उनकी जिंदगी में क्या न्याय मिल पाएगा या नहीं। उधर, गोपाल अंसल ने एक वर्ष कैद की सजा को रद्द करने के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर कर दी है।
मंगलवार को हादसे की 20वीं बरसी है। इस हादसे में मारे गए बच्चों, युवाओं व बुजुर्गों के पारिवारिक सदस्य आज भी न्याय पाने के लिए निचली अदालत से सर्वोच्च न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने गोपाल अंसल को हाल ही में एक वर्ष के लिए जेल भेज दिया था, अब वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सांसद राम जेठमलानी ने उनकी इस सजा को भी माफ करने के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर कर दी।
राष्ट्रपति ने इस याचिका को गृह मंत्रालय के पास स्थानांतरित कर दिया, तो गृह मंत्रालय ने उपराज्यपाल के पास दया याचिका भेजते हुए इस पर विचार करने को कहा है। फिलहाल याचिका विचाराधीन है।
नीलम कृष्ण मूर्ति ने संदेह जताया है कि संभवत: अपनी पहुंच के कारण वे दया पाने में सफल भी हो जाएं। गौरतलब है कि 13 जून, 1997 को फिल्म देखने आए 59 दर्शकों की आग लगने के कारण मौत हो गई थी, जबकि 100 से ज्यादा घायल हो गए थे।
केस से संबंधित दस्तावेज करवाए गायब
उपहार अग्निकांड मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्तों ने अदालत के अहलमद दिनेश चंद्र शर्मा के जरिये केस से संबंधित दस्तावेज भी गायब करवाए, इस आरोप में उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इस मामले में अहलमद के अलावा सुशील अंसल, गोपाल अंसल, एचएस पवार, पीपी बत्रा, अनूप सिंह व कर्नल डीपी मल्होत्रा अभियुक्त हैं।
अदालती रिकॉर्ड से दस्तावेज का खुलासा जनवरी 2003 को हो गया था। 22 नवंबर, 2006 को दिनेश चंद्र को गिरफ्तार कर आरोप पत्र दाखिल किया गया व 17 जनवरी, 2008 को दिनेश के अलावा अन्य को अभियुक्त बनाते हुए आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
आठ वर्ष की सुनवाई के बाद अदालत ने 31 मई, 2014 को अभियोग तय कर दिए, लेकिन मामले में सुनवाई की तरफ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दो वर्ष में मात्र एक ही गवाह से जिरह हो पाई। हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपियों की पुनर्विचार याचिका 12 मई, 2017 को खारिज कर दी, अब सुनवाई 16 अगस्त को तय की है।
पीड़ितों को धमकाया
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित नीलम कृष्ण मूर्ति व अन्य को धमकाने, जान से मारने की धमकियां देने, महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने व लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा करने के मामले में अंसल बंधुओं के अलावा उनके कर्मचारी प्रवीण शर्मा व दीपक कथपालियां के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
उच्च न्यायालय ने 3 जुलाई, 2007 को एक तरफा सुनवाई में निचली अदालत की सुनवाई पर रोक लगा दी थी और आठ वर्ष बाद हुई आधे घंटे की सुनवाई के बाद अदालत ने 3 मार्च, 2015 को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
14 जुलाई को अदालत ने अंसल बंधुओं को मामले से अलग कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने दोनों कर्मचारियों के खिलाफ अभियोग तय कर दिए, मगर दोनों ने बिना शर्त माफी मांग ली। अब कृष्ण मूर्ति को तय करना है कि वे माफी देती हैं या नहीं। सुनवाई एक जुलाई 2017 को तय है।
आमोद कंठ के खिलाफ भी मामला विचाराधीन
उपहार सिनेमा हॉल की बालकनी में अतिरिक्त सीटें लगवाकर रास्ता बंद करवाने के आरोप में तत्कालीन डीसीपी लाईसेंसिंग आमोद कंठ भी फंसे हुए हैं। आग से मरनों वाली की संख्या अधिक होने में यही कारण था।
आमोद कंठ ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए संबंधित विभाग से मंजूरी न लेने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 3 अक्तूबर, 2013 को याचिका खारिज कर दी।
कंठ ने अब सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की और अदालत ने 29 नवंबर, 2013 को सुनवाई पर रोक लगा दी। इसी कारण इस मामले में साकेत अदालत में भी सुनवाई नहीं हो पा रही। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई कब होगी, यह तय नहीं।
मृतकों को देंगे श्रद्धांजलि
मंगलवार 13 जून को इस घटना की 20वीं बरसी है। घटना में 59 दर्शकों की मौत हुई व 100 से ज्यादा घायल हुए थे। मृतकों को उनके परिजन व शुभचिंतक उनकी याद में बने ग्रीन पार्क एक्सटेंशन स्थित स्मृति उपवन में प्रात: 9 बजे श्रद्धांजलि देंगे।