हैट्रिक लगेगी या छिनेगा ताज, गौतमबुद्धनगर में त्रिकोणीय है मुकाबला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गौतमबुद्ध नगर की तीनों विधानसभाओं में दो चुनावों में एक जैसा ही परिणाम रहा है। नोएडा सीट पर दो चुनावों में भाजपा का कब्जा रहा है। दादरी और जेवर विधानसभा क्षेत्र में बसपा लगातार दो बार से जीतती आ रही है। क्या दोनों पार्टियां हैट्रिक लगाएंगी या फिर इनका ताज छिन जाएगा, इसका फैसला आज ईवीएम मशीन में कैद हो जाएगा।
सुबह होते-होते असमंजस वाले मतदाता भी सुनिश्चित कर लेंगे कि वोट कहां देना है। इस बार के चुनाव में मुकाबले के चेहरे तो पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम अखिलेश यादव, कांग्रेस से राहुल गांधी और बसपा से मायावती ही हैं।
दरअसल, पिछले दो चुनावों के समीकरण पर ध्यान दें तो नोएडा सीट पर भाजपा और दादरी व जेवर पर बसपा का कब्जा बरकरार है। इस बार इतना जरूर हुआ कि नोएडा वीवीआईपी सीट हो गई, क्योंकि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र चुनाव लड़ रहे हैं। दादरी और जेवर में बहुत कुछ नहीं बदला है, लेकिन दूसरे दलों के प्रत्याशियों ने कसर भी नहीं छोड़ी है।
नोएडा में पूरी सरकार लड़ा रही चुनाव
पंकज को टक्कर देने के लिए सपा-कांग्रेस प्रत्याशी सुनील चौधरी और बसपा प्रत्याशी रविकांत मिश्रा हैं। नोएडा सीट 2012 में बनी थी। भाजपा से पहले विधायक डॉ. महेश शर्मा बने। उनके सांसद बनने के बाद 2014 के हुए उपचुनाव में भाजपा से ही विमला बाथम विधायक बनीं।
दादरी में बहुत कुछ नहीं बदला
दादरी विधान सभा क्षेत्र गुर्जर बहुल है। यही कारण है कि भाजपा के तेजपाल नागर, बसपा से सत्यवीर गुर्जर, कांग्रेस-सपा से समीर भाटी के बीच मुकाबला है। तीनों प्रत्याशी कहते हैं कि उन्होंने मेहनत की है। मालूम हो कि 2007 व 2012 में बसपा से सत्यवीर गुर्जर दादरी से विधायक हैं।
जेवर में कड़ा मुकाबला
गुर्जर और ठाकुर बहुल सीट पर इस बार कांटे की टक्कर है। बसपा से वेदराम भाटी को सीधी टक्कर ठाकुर धीरेंद्र सिंह से मिल रही है। चुनाव जातिगत ध्रुवीकरण पर हो रहा है। इसी के साथ सपा-कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी नरेंद्र नागर भी खुद को रेस में मान रहे हैं। जेवर से भी 2007 व 2012 में बसपा से वेदराम भाटी विधायक हैं।
रालोद बिगाड़ेगा खेल
रालोद ने नोएडा से बृजेश यादव को टिकट दिया है। वह यहां वोट काटने की भूमिका में हैं। वहीं, दादरी से रविंद्र भाटी हैं। पहले उन्हें सपा से टिकट मिला, फिर कट गया। तब से ही वह सपा को कोस रहे हैं।
सबसे दिलचस्प बात तो जेवर की है। यहां पर कमल शर्मा प्रत्याशी हैं। वह पहले भाजपा से टिकट के दावेदार थे, नहीं मिला तो बसपा में चले गए। वहां भी बात नहीं बनी तो रालोद से चुनाव लड़ रहे हैं।
मुस्लिम वोटर की भूमिका अहम
मौजूदा स्थिति ऐसी है कि किसी भी पार्टी की प्रदेश में लहर नहीं है। मुस्लिम वोटर फैसला कर चुका है कि वोट किसे देना है। बूथ पर मुस्लिम मतदाताओं की भीड़ बता देगी कि उनका रुख क्या है, क्योंकि नोएडा, दादरी और जेवर में ठीकठाक मुस्लिम मतदाता हैं। युवा मतदाता जरूर विवेक से काम करता है।- प्रो. दुष्यंत कुमार, राजनीति विभाग द्रोणाचार्य डिग्री कॉलेज दनकौर