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पावर केबिन की जगह ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगेगा
Tue, 03 Sep 2019 08:57 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 03 Sep 2019 08:57 PM IST
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ट्रेनों में जल्द ही पावर केबिन की जगह यात्री कोच लगाया जाएगा। उत्तर रेलवे ज्यादा से ज्यादा ट्रेनों में हेड ऑन जेनरेशन से बिजली आपूर्ति की योजना पर काम कर रहा है। फिलहाल इसके लिए 11 जोड़ी ट्रेनों को चुना गया है। इससे ट्रेनों से जेनरेटर सेट हटकर यात्री कोच अतिरिक्त जुड़ जाएगा।
उत्तर रेलवे 14 जोड़ी प्रीमियम मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में हेड ऑन जनरेशन प्रणाली से बिजली की आपूर्ति कर रहा है। इनमें 6 जोड़ी शताब्दी, 4 जोड़ी राजधानी, 12235/36 आनंद विहार टर्मिनल-मधुपुर जंक्शन हमसफर एक्सप्रेस, 22401 दिल्लीसराय रोहिल्ला-उधमपुर वातानुकूलित एक्सप्रेस, ट्रेन संख्या 12280/79 ताज एक्सप्रेस, 12497/98 शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस शामिल हैं।
इन ट्रेनों से रेलवे डीजल की खपत में करीब 42 करोड़ रुपये सालाना बचा रहा है। इस प्रयोग को देखते हुए उत्तर रेलवे ने निर्णय लिया है कि 11 जोड़ी ट्रेनों में 2 शताब्दी एक्सप्रेस, 2 दुरंतो और 7 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में भी हेड ऑन जेनरेशन तकनीक से बिजली आपूर्ति की जाए।
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उल्लेखनीय है कि एलएचबी कोच के वातानुकूलन, बिजली, पंखे, चार्जिंग प्वाइंट्स और रसोई यान में लगने वाली बिजली (होटल लोड) से संचालित होती है। पावर कार की जगह बिजली आपूर्ति विद्युत लोकोमोटिव से उत्पन्न की जा जाती है। इंजन के पेंटोग्राफ से विद्युत करंट को टैप करके पहले ट्रांसफार्मर को भेजा जाता है और फिर ट्रेन के कोच की विद्युत जरूरतों को पूरा किया जाता है।
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उत्तर रेलवे 14 जोड़ी प्रीमियम मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में हेड ऑन जनरेशन प्रणाली से बिजली की आपूर्ति कर रहा है। इनमें 6 जोड़ी शताब्दी, 4 जोड़ी राजधानी, 12235/36 आनंद विहार टर्मिनल-मधुपुर जंक्शन हमसफर एक्सप्रेस, 22401 दिल्लीसराय रोहिल्ला-उधमपुर वातानुकूलित एक्सप्रेस, ट्रेन संख्या 12280/79 ताज एक्सप्रेस, 12497/98 शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस शामिल हैं।
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इन ट्रेनों से रेलवे डीजल की खपत में करीब 42 करोड़ रुपये सालाना बचा रहा है। इस प्रयोग को देखते हुए उत्तर रेलवे ने निर्णय लिया है कि 11 जोड़ी ट्रेनों में 2 शताब्दी एक्सप्रेस, 2 दुरंतो और 7 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में भी हेड ऑन जेनरेशन तकनीक से बिजली आपूर्ति की जाए।
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उल्लेखनीय है कि एलएचबी कोच के वातानुकूलन, बिजली, पंखे, चार्जिंग प्वाइंट्स और रसोई यान में लगने वाली बिजली (होटल लोड) से संचालित होती है। पावर कार की जगह बिजली आपूर्ति विद्युत लोकोमोटिव से उत्पन्न की जा जाती है। इंजन के पेंटोग्राफ से विद्युत करंट को टैप करके पहले ट्रांसफार्मर को भेजा जाता है और फिर ट्रेन के कोच की विद्युत जरूरतों को पूरा किया जाता है।