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बाइक है नहीं और चालान पहुंच गया घर, पोस्टमैन से मिला लिफाफा खोलकर देखा तो उड़ गए होश
Wed, 20 Nov 2019 09:13 AM IST
शाहरुख खान
मनोज कुमार, अमर उजाला, नोएडा
मनोज कुमार, अमर उजाला, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 20 Nov 2019 09:13 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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यातायात पुलिस ने एक बाइक का चालान कर दिया और उसे संबंधित व्यक्ति के पते पर भेज दिया। 300 रुपये का चालान जब पते पर पहुंचा तो पता चला कि जिसके नाम से चालान काटा गया था, उसी नाम से 15 साल पहले किसी और ने बाइक ले रखी थी। जबकि पीड़ित के पास बाइक ही नहीं है।
इसके बाद पीड़ित चालान लेकर एआरटीओ आफिस पहुंचा तो अफसरों ने उसे यातायात पुलिस द्वारा काटा गया चालान बताया और इसे धोखाधड़ी का मामला बताते हुए पुलिस के पास भेज दिया। अब पीड़ित चालान की प्रति लेकर भटक रहा है।
मूलरूप से बिहार निवासी आरएस झा नोएडा के सेक्टर-55 में परिवार के साथ रहते हैं। मंगलवार को उनके घर पोस्टमैन आया और उसने यातायात पुलिस की ओर से भेजा गया लिफाफा उन्हें थमा दिया। पीड़ित ने लिफाफा खोलकर देखा तो भौचक्का रह गया। लिफाफे में उनके नाम से 300 रुपये का बाइक का ऑनलाइन चालान था। जबकि उनके पास तो कोई बाइक ही नहीं है।
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ऐसे में वह अचंभित हो गए कि बाइक है नहीं और चालान घर पहुंच गया। मामले की जानकारी के लिए वह चालान लेकर सेक्टर-32 स्थित एआरटीओ आफिस पहुंचे और बाइक संबंधित सूचना निकलवाई तो पता चला कि सिर्फ उनके नाम का ही नहीं बल्कि घर और अन्य दस्तावेज का प्रयोग कर करीब 15 साल पहले किसी और ने बाइक खरीदी थी।
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इसके बाद पीड़ित चालान लेकर एआरटीओ आफिस पहुंचा तो अफसरों ने उसे यातायात पुलिस द्वारा काटा गया चालान बताया और इसे धोखाधड़ी का मामला बताते हुए पुलिस के पास भेज दिया। अब पीड़ित चालान की प्रति लेकर भटक रहा है।
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मूलरूप से बिहार निवासी आरएस झा नोएडा के सेक्टर-55 में परिवार के साथ रहते हैं। मंगलवार को उनके घर पोस्टमैन आया और उसने यातायात पुलिस की ओर से भेजा गया लिफाफा उन्हें थमा दिया। पीड़ित ने लिफाफा खोलकर देखा तो भौचक्का रह गया। लिफाफे में उनके नाम से 300 रुपये का बाइक का ऑनलाइन चालान था। जबकि उनके पास तो कोई बाइक ही नहीं है।
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ऐसे में वह अचंभित हो गए कि बाइक है नहीं और चालान घर पहुंच गया। मामले की जानकारी के लिए वह चालान लेकर सेक्टर-32 स्थित एआरटीओ आफिस पहुंचे और बाइक संबंधित सूचना निकलवाई तो पता चला कि सिर्फ उनके नाम का ही नहीं बल्कि घर और अन्य दस्तावेज का प्रयोग कर करीब 15 साल पहले किसी और ने बाइक खरीदी थी।
इस पर वह एआरटीओ पास शिकायत करने पहुंचे और पूरा प्रकरण सुनाया। मामले की जानकारी होने के बाद एआरटीओ ने जांच कराई तो बताया गया कि चालान यातायात पुलिस की ओर से ऑनलाइन किया गया है। जबकि बाइक खरीदने के दौरान दिए गए दस्तावेज पीड़ित के नाम के हैं। ऐसे में यह मामला धोखाधड़ी का है। अफसर ने पीड़ित को बताया कि वह पुलिस की शरण में जाए।
किरायेदार बनकर कर जाते हैं धोखाधड़ी
नोएडा में इस तरह के कई मामले आते हैं। बताया गया कि किरायेदार किसी न किसी बहाने से मकान मालिक के दस्तावेज ले लेते हैं और फिर उनके नाम पर लोन कराकर वाहन ले लेते हैं। ऐसे में किरायेदार से संबंधित किसी तरह का चालान या फिर अन्य कोई कागजात मकान मालिक के घर पहुंचता है तो मामले का पता चलता है। परिवहन विभाग में इस तरह के अक्सर पीड़ित आते हैं।
एक युवक चालान लेकर आया था उसने बताया कि चालान में दर्ज नाम व पता तो उसका है। लेकिन, उसके पास बाइक नहीं है और न कभी उसने इस नंबर की बाइक खरीदी थी। इस पर पीड़ित को बताया गया कि यह धोखाधड़ी का मामला है और वह पुलिस के पास जाए।
- एके पांडेय, एआरटीओ प्रशासन, गौतमबुद्ध नगर
किरायेदार बनकर कर जाते हैं धोखाधड़ी
नोएडा में इस तरह के कई मामले आते हैं। बताया गया कि किरायेदार किसी न किसी बहाने से मकान मालिक के दस्तावेज ले लेते हैं और फिर उनके नाम पर लोन कराकर वाहन ले लेते हैं। ऐसे में किरायेदार से संबंधित किसी तरह का चालान या फिर अन्य कोई कागजात मकान मालिक के घर पहुंचता है तो मामले का पता चलता है। परिवहन विभाग में इस तरह के अक्सर पीड़ित आते हैं।
एक युवक चालान लेकर आया था उसने बताया कि चालान में दर्ज नाम व पता तो उसका है। लेकिन, उसके पास बाइक नहीं है और न कभी उसने इस नंबर की बाइक खरीदी थी। इस पर पीड़ित को बताया गया कि यह धोखाधड़ी का मामला है और वह पुलिस के पास जाए।
- एके पांडेय, एआरटीओ प्रशासन, गौतमबुद्ध नगर