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ट्रैफिक जाम गुडग़ांव को दुनिया भर में कर रहा बदनाम

Mon, 15 Aug 2016 10:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Mon, 15 Aug 2016 10:15 AM IST
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traffic jam becoming reason of shame in world
दिल्ली- गुड़गांव एक्सप्रेसवे जाम - फोटो : ANI

आजादी के इन 70 सालों में ग्रामीण गुडग़ांव देखते ही देखते विकास के उस शिखर पर विराजमान जो देश के अन्य शहरों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है। यह शहर आधुनिकता, विकास और अपनी चमकदमक से दुनिया के खास शहरों में शुमार हो गया है। यहां 250 फाच्र्यून-500 कंपनियां हैं। यहीं पर देश का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल हब है। यहां वह सब कुछ मौजूद जो किसी भी शहर को वैश्विक बनाने के लिए जरूरी है। मगर यहां कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो शहर की शान को बट्टा लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही हैं। आइए उन्हीं कुछ चुनिंदा परेशानियों की चर्चा करते हैं।

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अगर किसी राह चलते व्यक्ति से भी पूछा जाए कि गुडग़ांव में आजकल सबसे बड़ी समस्या क्या है। नि:संदेह वह ट्रैफिक जाम का नाम लेगा। इससे आम से लेकर खास तक काफी परेशान है। आलम यह है कि जाम के कारण गुडग़ांव का नाम देश ही नहीं दुनिया भर में बदनाम हो रहा है। लोगों का मानना है कि खराब यातायात प्रबंधन और अनियोजित विकास इसका सबसे बड़ा कारण है। पिछले दिनों के महाजाम ने गुडग़ांव की जो भयानक तस्वीर पेश की उससे आईटी-बीपीएम, कॉरपोरेट और इंडस्ट्री तक के विश्वास को हिला कर रख दिया था। आने वाले दिनों में भी इस प्रकार के जाम के लगने से इनकार नहीं किया जा सकता।
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गुडग़ांव में बुनियादी सुविधा का भारी अभाव हैं। यहां की सड़के वाहनों के दबाव के हिसाब से काफी पतली हैं। शहर की करीब मुख्य सड़कों की चौड़ाई को एक सीमा से अधिक बढ़ाया नहीं जा सकता। इस कारण जाम की समस्या को दूर करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को ठोस यातायात प्रबंधन करना होगा। जो अभी कहीं नहीं दिखता है। अधिकतर चौक-चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी नहीं होती। अक्सर ट्रैफिक होमगार्ड और निजी कंपनियों के गार्डों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। जिससे दिनों दिन संकट बढ़ता जा रहा है।
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हल्की बारिश के बाद दिल्ली-गुडग़ांव एक्सप्रेस-वे, सर्विस लेन और शहर के आंतरिक भागों में भारी जाम लगने लगता है। बारिश की बात तो दूर आम दिनों में भी गुडग़ांव वालों की जाम नियति बन चुकी है। हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के चेयरमैन किशन कपूर का कहना है कि जाम ने पूरे गुडग़ांव को बदनाम कर दिया है। अगर इससे निपटने का ठोस इंतजाम सरकार और प्रशासन ने नहीं किया तो उद्योगों से लेकर कॉरपोरेट कंपनियों तक को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। गुडग़ांव में जाम की समस्या को देखते हुए कई कंपनियों ने यहां विस्तार की योजना को विराम दे दिया है। निवेशकों के बीच भी जाम को लेकर काफी चर्चा है।

गुडग़ांव। साइबर सिटी में सड़कों से लेकर बाजारों में तक में अतिक्रमण का बोलबाला है। यह लोगों के लिए किसी नासूर से कम नहीं है। अतिक्रमण खत्म करने में नगर निगम, हुडा और एचएसआईआईडीसी लगातार नाकाम हो रहे हैं। इनके द्वारा जाम हटाने की कार्रवाई महज औपचारिकता ही साबित हो रही है। शहर की शायद ही कोई सड़क हो जो अतिक्रमण से मुक्त हो। न्यू और ओल्ड रेलवे स्टेशन रोड, सेक्टर-4, सेक्टर-15, सेक्टर-15, महरौली रोड, ओल्ड दिल्ली रोड, गोल्फ कोर्स रोड लेकर डीएलएफ के क्षेत्रों में भी इसकी बाढ़ है। सदर बाजार में तो दुकानदार ही पैसे लेकर अपने दुकान के आगे ही दुकान लगवाते हैं।

नगर निगम की टीम जब वहां कार्रवाई करती है तो अतिक्रमणकारी भाग जाते हैं। कुछ देर बाद ही स्थिति जस की तस हो जाती है। हरियाणा व्यापार मंडल गुडग़ांव के अध्यक्ष केएल पहवा का कहना है कि अतिक्रमण से सदर बाजार क व्यापारी भी काफी परेशान हैं। किसी प्रकार की आपदा की स्थिति में बाजार में फायर ब्र्रिगेड का आना भी काफी मुश्किल हो जाता है।

शहर के सदर बाजार में अतिक्रमण इतना भयानक है कि वाहन से जाना तो दूर पैदल चलना भी दुश्वार है। शहर वासियों का कहना है कि गुडग़ांव में अतिक्रमण एक बहुत बड़ा कारोबार है। रेहड़ी से लेकर फेरी तक वालों से पैसा लेकर उन्हें अतिक्रमण करने की इजाजत दी जाती है। नगर निगम रोजाना अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है मगर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता है। लोगों ने इस कार्रवाई को सिर्फ नाटक बताया है।

अतिक्रमण की यह समस्या सिर्फ बाजारों और सड़कों तक ही सीमित नहीं रही है। औद्योगिक क्षेत्जरों में भी इसका काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। मानेसर क्षेत्र के उद्यमियों की ओर से अतिक्रमण की लगातार शिकायत की जा रही है। उनका कहना है कि अतिक्रमण को हटाने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। मानसेर निवासी सतीश कुमार का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में शराब ठेका स्थापित कर दिया जाता है। आलम यह है कि इन पर उचित कार्रवाई नहीं होती है।

ट्रैफिक जाम गुडग़ांव का सबसे बड़ा बैक ड्रा है। अगर यह समस्या नहीं हो तो गुडग़ांव एक शानदार स्थान है। पीक आवर में गुडग़ांव की सड़कों पर जाम को जो नजारा दिखता है उससे दिल दहल जाता है। दूसरी चीज यहां लोगों में ट्रैफिक सेंस का भी भारी अभाव है। उन्हें अधिक से अधिक जागरूक करने की जरूरत है। यहां लेन ड्राइविंग की कोई व्यवस्थ नहीं है इससे भी संकट बढ़ता जा रहा है।-रामिल बंसल

निश्चित रूप से गुडग़ांव में नाम बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए ठोस इंतजाम की जरूरत है। यह तभी संभव है जब सरकारी विभागी में आपसी लालमेल हो। आए दिन यहां कहीं न कहीं जाम लगता रहता है। यही कारण है कि गुडग़ांव में लोग आने से कतराते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले जाम के कारण अक्सर देरी से काम पर पहुंच पाते हैं।-मनोज मोकलवास

गुडग़ांव की सड़कों पर अतिक्रमण और जाम दो ऐसी समस्याएं हैं जिनका समाधान काफी मुश्किल दिखाई दे रहा। पिछले दिनों महाजाम ने जिस प्रकार से गुडग़ांव और दिल्ली-एनसीआर लोगों को पेरशान किया था वह काफी चिंताजनक है। भविष्य में ऐसी भयावह स्थिति नहीं बने इसके लिए काफी कुछ करने की जरूरत है। इसी प्रकार से अतिक्रमण पर भी सख्ती की दरकार है।-सुनील पंवार


गुडग़ांव को बेहतर शहर बनाने के लिए सरकार को विदेशी निवेश लाने से पहले बुनियादी सुविधा दुरुस्त करने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं होगा तो स्थिति और खराब होने से कोई नहीं रोक सकता है।-डॉ.अशोक दिवाकर

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