रुला देगी यमुना की यह तस्वीर: नदी में फिर दिखा जहरीला झाग, प्रदूषण बढ़ने का डर... जलीय जीवन को भी नुकसान
राजधानी दिल्ली के कालिंदी कुंज घाट पर यमुना नदी में जहरीले झाग की मोटी परत देखी गई, जो प्रदूषण के गंभीर स्तर को दर्शाता है। नदी के पानी में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी के कालिंदी कुंज घाट पर यमुना नदी में रविवार को फिर से जहरीले झाग की मोटी परत देखी गई। झाग इतना घना था कि नदी का एक बड़ा हिस्सा लगभग ढक गया था। नदी के किनारे बंधी नावों और किनारों पर यह झाग चिपका हुआ था। झाग के साथ-साथ नदी के किनारे कचरा भी फैला हुआ था। इसमें प्लास्टिक की बोतलें, फूल, कटे हुए बाल और ब्लेड भी शामिल थे।
पर्यावरण कार्यकर्ता पंकज कुमार ने बताया कि दिसंबर और जनवरी में नदी का पानी पिछले साल की तुलना में ज्यादा प्रदूषित है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की 3 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना के पानी में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर 17 से 25 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जबकि सुरक्षित सीमा तीन मिलीग्राम प्रति लीटर है। यह जलीय जीवन के लिए खतरा है।
वहीं, फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का स्तर भी बहुत ज्यादा है, जो साफ बताता है कि नदी में सीवेज मिला हुआ है। अर्थ वॉरियर्स समूह के सदस्य अतुल कुमार और विश्वास द्विवेदी ने बताया कि यह झाग सिर्फ लोगों की सेहत के लिए खतरनाक नहीं है, बल्कि नदी के पौधों और जलीय जीवन को भी नुकसान पहुंचाता है।
झाग सूरज की रोशनी को पानी तक नहीं पहुंचने देता, जिससे पानी की गुणवत्ता और खराब हो जाती है। वॉलंटियर्स हर रविवार नदी की सफाई करते हैं, लेकिन लोग अब भी नदी में कचरा फेंकते हैं।