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हवा की गुणवत्ता मापने वाले 100 स्टेशन लगाने में ही खत्म हो जाएगी रकम
विवेक मिश्रा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 03 Feb 2018 10:13 AM IST
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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या बिना बड़े बजट के कैसे दूर होगी। प्रदूषण नियंत्रित करने की सर्वोच्च इकाई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को आम बजट में इस बार जितना मिला है उतने बजट में वायु प्रदूषण के सिर्फ 100 रीयल टाइम आंकड़े देने में सक्षम वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन ही स्थापित हो पाएंगे।
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सीपीसीबी को इस बार 100 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। पिछली बार भी बजट इसी आकार का था। एक रीयल टाइम डाटा देने वाले वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन का खर्च करीब एक करोड़ रुपये होता है।
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देशभर की बात न करें तो दिल्ली के अलावा एनसीआर राज्यों के शहर में ही 100 से ज्यादा रीयल टाइम डाटा वाले वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों की दरकार है। दिल्ली में अभी इस तरह के 17 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन हैं, जिनसे रीयल टाइम डाटा मिलता है।
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आने वाले समय में इन 17 के अलावा इस तरह की क्षमता वाले 20 और नए स्टेशन होंगे। जबकि दिल्ली के आस-पास स्थित शहरों में भी ऐसे ही स्टेशनों की मौजूदगी होनी है। र्यावरणविद् व एडवोकेट राहुल चौधरी का कहना है कि वायु गुणवत्ता के सही आंकड़ों, तथ्यों और सूचनाओं की कमी के चलते ही एक मजबूत नीति तैयार नहीं हो पाई है।
पर्यावरणविद सुनील दहिया के मुताबिक, वायु प्रदूषण के कारण सेहत पर पड़े दुष्प्रभाव और बोझ को कम करने की दिशा में भी कोई ऐलान नहीं किया गया। राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम के तहत सरकार ने वादा जरूर किया लेकिन बजट की कोई घोषणा नहीं की।
स्वच्छ ऊर्जा भी वायु गुणवत्ता के लिए बेहद जरूरी है। इस दिशा में स्पष्ट कोई ऐलान नहीं किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से सेवानिवृत्त वैज्ञानिक व डॉ डी साहा ने बताया कि आम बजट में पराली की समस्या का निराकरण करने के लिए पहल की गई है। यह स्वागत योग्य कदम है।
डॉ साहा ने कहा कि वायु गुणवत्ता को ठीक करने के लिए सबसे पहले हमें एक मजबूत सूचना तंत्र चाहिए। दिल्ली से लगे इलाकों खासतौर से नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों में अभी तक यह तंत्र खड़ा नहीं हो पाया है। अब पर्यावरण संरक्षण शुल्क निधि से करीब 25 करोड़ रुपये खर्च कर इन इलाकों में पांच-पांच स्टेशन लगाए जाने हैं।