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थकान दूर करने के नाम पर युवाओं में हाइपर टेंशन बढ़ा रही शराब  

Mon, 16 May 2016 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Mon, 16 May 2016 09:28 AM IST
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To find the name of increasing hypertension in young wine
टीनएजर पीते हैं ज्यादा शराब

थकान और टेंशन दूर करने के नाम पर शराब पीने वालों के लिए बुरी खबर है। ऐसा करने से यह दूर नहीं होता, बल्कि व्यक्ति उच्च रक्तचाप (हाइपर टेंशन) का शिकार हो जाता है। यह बात मेदांता अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट और इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. रजनीश कपूर ने अपने रिसर्च में साबित किया है। मौज मस्ती के दौरान केवल वीकेंड पर भी शराब पीना हाइपरटेंशन का कारण है।

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डॉ. कपूर ने बताया कि हृदय संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंचे 1670 मरीजों में से हाइपरटेंशन के 475 मरीजों का चयन किया गया। इसमें 40 से कम उम्र के महिला और पुरुष थे।  जो दिल्ली-एनसीआर के अलावा आस-पास के इलाके से थे। इन पर ऑब्जर्वेशन पद्धति के तहत मई 2015 से मार्च 2016 तक रिसर्च किया गया। 
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इनकी केस स्टडी के दौरान पाया गया कि 475 मरीजों में 171 मरीज एक सप्ताह में एक बार से लेकर तीन बार तक शराब का सेवन करते थे। इनमें से 94 प्रतिशत मरीजों ने 18 साल की उम्र के बाद से कम से कम चार साल तक शराब का सेवन किया, जबकि इनमें से कुछ मरीज ऐसे थे जिन्होंने एक सप्ताह के भीतर ही शराब का सेवन बंद कर दिया। जिसमें 28.4 फीसदी युवा हाइपरटेंशन के शिकार हुए।
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डॉ. रजनीश कपूर का दावा है कि यह हाइपर टेंशन का नया कारण है। अभी तक मोटापा, टेंशन, स्मोकिंग आदि कारण थे, लेकिन शराब को यह कारण नहीं माना जाता था। अब रिसर्च के बाद साफ हो गया है कि शराब तनाव दूर करने का कारण नहीं, बल्कि हाइपरटेंशन का प्रमुख कारण है। 

अध्ययन से यह संकेत मिले हैं कि बिंज ड्रिकिंग यानी करीब दो घंटे के भीतर पांच या अधिक ड्रिंक्स का सेवन किया जाता है तो रक्त चाप का स्तर तत्काल उपर उठ जाता है। रिसर्च के दौरान साहित्य अध्ययन में कनाडा के शोधकर्ताओं की ओर से किए गए एक अध्ययन के हवाले से दावा कि गया कि 20 से 24 साल के युवाओं का रक्तचाप उन युवाओं की तुलना में काफी अधिक होता है जो शराब का सेवन नहीं करते हैं।


डॉ.कपूर ने कहा कि उच्च रक्त चाप शरीर में रक्त का संचार करने वाली नलिकाओं पर दवाब पैदा करता है। इससे या तो रक्त नलिकायें अवरोधित हो जाती हैं या कमजोर हो जाती है जिससे हृदय या मस्तिष्क को नुकसान पहुंच सकता है। इससे स्ट्रोक, दिल के दौरे, हार्ट फेल्योर, किडनी को नुकसान पहुंचने और नेत्र समस्याएं जैसे खतरे बढ़ते हैं। 

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