फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   to control pollution in delhi supreme court accepted central government plan

इमरजेंसी लेबल पर हो प्रदूषण तो लागू हो सम-विषय फार्मूला, केंद्र सरकार के प्लान को मंजूरी

Sat, 03 Dec 2016 10:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 03 Dec 2016 10:08 AM IST
सार

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर केंद्र की कार्ययोजना को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी

विज्ञापन
to control pollution in delhi supreme court accepted central government plan
- फोटो : जी पॉल/अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर इमरजेंसी लेबल पर चला जाए तो सम-विषय फार्मूला लागू कर दिया जाना चाहिए। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण विभिन्न स्तरों को लेकर केंद्र सरकार की कार्ययोजना को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी है।

विज्ञापन


चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर निगरानी रखने वाले केंद्रों की संख्या में इजाफा करने के लिए भी कहा है।
विज्ञापन


साथ ही केंद्रों को नवीनतम तकनीकों से लैस करने और मूल सुविधाओं में बढ़ोतरी करने के लिए कहा है। पीठ ने सीपीसीबी को इसके लिए छह महीने का वक्त दिया है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि अगर पार्टिकुलेट मैटर(पीएम) 2.5 का स्तर 250 से 430 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाएगा तो उसे गंभीर स्थिति माना जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसी स्थिति में निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है और सम-विषम फार्मूला को लाया जाना चाहिए। वहीं पर्यावरणविद् सुनीता नारायण ने कहा कि केंद्र सरकार की कार्ययोजना की तीन स्तरों सामान्य से खराब, बहुत खराब और गंभीर को प्रभावी बनाया जा सकता है।

प्रदूषण पर निगरानी के लिए 57 लाख होंगे खर्च

to control pollution in delhi supreme court accepted central government plan

इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए पीठ ने केंद्र सरकार की यह एक्शन प्लान पर्यावरण प्रदूषण(नियंत्रण एवं निरोधक) अथॉरिटी(इपका) के आदेशों के तहत लागू होगा और सभी अथॉरिटी को इसी दिशा में काम करना होगा।

साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह चार हफ्ते में कारखानों और बिजली उत्पादन करने वाले प्लांटों से निकलने वाले पेट्रोलियम कोक सहित अन्य हानिकारक तत्वों का परीक्षण करने केलिए कहा है।

सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि सीपीसीबी का प्रस्ताव है कि प्रदूषण पर निगरानी रखने वाले सेंट्रल कंट्रोल रूप को उन्नत बनाने के लिए 57 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत इंटरनेट, ऑप्टिकल फाइबर आदि को उन्नत बनाने का काम होगा।

साथ ही सीपीसीबी की यह भी योजना है कि उत्तर प्रदेश में 12 निगरानी केंद्र के गठन की योजना है। जबकि हरियाणा में नौ और राजस्थान में 20 नए केंद्र बनाने की योजना है। दिल्ली में पहले से ही 28 ऐसे केंद्र हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed