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तिलपत गांव को गोद लेकर भूल गए सांसद, तीन साल में दो बार दिए दर्शन
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 15 Jun 2017 09:30 AM IST
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सांसद कृष्णपाल गुर्जर का गोद लिया गांव तिलपत
- फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद मोदी सरकार ने तीन साल पूरे कर लिए हैं। सरकार का गठन होने के बाद सभी सांसदों को एक-एक गांव गोद लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 'सांसद आदर्श ग्राम’ को दो साल में पूरा करना था लेकिन फरीदाबाद का तिलपत गांव आज भी सांसद की मेहरबानी का इंतजार कर रहा है।
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तीन साल के कार्यकाल में फरीदाबाद के सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर महज दो बार तिलपत गए। ग्रामीणों की मानें तो पिछले डेढ़ साल से सांसद ने अपने गोद लिए गांव में जाने की जहमत तक नहीं उठाई। सांसद की अनदेखी के कारण गांव के जो हालात तीन साल पहले थे वही आज भी हैं।
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केंद्र सरकार ने आदर्श ग्राम योजना को पूरा करने के लिए समय सीमा निर्धारित की थी जिसके मुताबिक वर्ष 2016 के अंत तक तिलपत गांव को आदर्श गांव बनाया जाना था लेकिन न सांसद ने इसमें रुचि दिखाई और न ही जिला प्रशासन की तरफ से गांव की तरफ ध्यान दिया गया।
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गांव के सरपंच नंदकिशोर ने बताया कि आदर्श ग्राम योजना के तहत तीन साल में गांव के शमशान घाट और खेल स्टेडियम की चारदीवारी से ज्यादा कुछ नहीं हो पाया। इस साल 2.5 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ है लेकिन विकास के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है।
मोदी सरकार के पहले ही मंत्रिमंडल में स्थानीय सांसद को जगह मिलने के बाद 11 नवंबर 2014 को तिलपत गांव गोद लेने की घोषणा हुई थी। ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि अब जरूर गांव की दशा बदलेगी लेकिन सांसद गांव के लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं।
तिलपत का इतिहास
इस गांव का इतिहास साढ़े पांच हजार वर्ष पुराना बताया जाता है। इसे महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने कौरवों से जो पांच गांव मांगे थे उनमें तिलपत गांव भी एक था। यहां ब्राह्मण बाहुल्य गांव माना जाता है। गांव में स्थित बाबा सूरदास का मंदिर देशभर में ख्याति प्राप्त है। प्रत्येक मंगलवार को यहां दिल्ली-एनसीआर सहित दूर दराज के क्षेत्र से हजारों भक्तों का तांता लगता है।
हालात-ए-तिलपत
:-शिक्षा: महज एक पुराना सरकारी स्कूल है। इसे नए सिरे से बनाने व नए स्कूल की मांग के अलावा आईटीआई की मांग उठती रही है।
:-स्वास्थ्य: स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर महज एक डिस्पेंसरी है जिसमें डॉक्टर नहीं है बल्कि नर्स से काम चलाया जा रहा है।
:-सड़कें: गांव की सड़कें बदहाल स्थिति में हैं। ऐतिहासिक सूरदास मंदिर को जोडने वाला मुख्य मार्ग तक जर्जर हालात में है।
:-बिजली: कहने को तिलपत सांसद आदर्श गांव दर्जा प्राप्त है लेकिन गांव 18 से 20 घंटे की बिजली कटौती झेल रहा है।
आदर्श गांव के मानक:
-गांव में सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक एकता व मानव विकास को प्राथमिकता।
-आबादी के सभी वर्गों को बेहतर जीवनयापन के अवसर उपलब्ध करवाना।
-उन्नत बुनियादी सुविधाएं, अधिकतम उत्पादकता।
-बेहतर मानव विकास, बेहतर आजीविका के अवसर।
-असमानता में कमी, व्यापक सामाजिक एकजुटता।
-अधिकार और हकदारी के लिए पहुंच दिलाना, समृद्ध सामाजिक पूंजी।
गांव की प्रमुख समस्याएं:
-गांव से शहर तक आनेजाने के लिए सार्वजनिक परिवहन सुविधा नहीं है।
-गांव में बरसाती पानी के निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
-ठोस कचरा निस्तारण के लिए कोई प्रबंध नहीं।
-गांव तक आनेजाने के लिए गुडगांव एवं आगरा नहर पर केवल एक पुल है।
गांव की आबादी 20,514
कुल घरों की संख्या 4099
पुरुष 11115
महिलाएं 9399
साक्षरता दर 65 प्रतिशत
(2011 की जनगणना के अनुसार)
मैंने जो जिम्मेदारी ली थी उसका मुझे पूरा ध्यान है। तिलपत को आदर्श गांव बनाने के लिए 13 करोड़ रुपये की योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इस गांव की तस्वीर जरूर बदलेगी।-कृष्णपाल गुर्जर, सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री
तिलपत गांव को दो वर्ष में आदर्श बनाना था लेकिन स्थानीय सांसद ने गोद लेने के बाद गांव की तरफ झांका तक नहीं। गांव में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं।-ललित नागर, विधायक तिगांव
आदर्श ग्राम योजना के तहत गांव में कुछ खास नहीं हुआ। तीन साल पहले जैसे हालात थे वो ही अब भी हैं। सांसद को कई बार गांव में आमंत्रित किया गया लेकिन वे नहीं आए।-नंदकिशोर, सरपंच तिलपत गांव
तीन साल में कुछ नहीं बदला। कहने को तिलपत का चयन आदर्श गांव के लिए किया गया लेकिन न स्थानीय सांसद ने और न ही अधिकारियों ने गांव की तरफ कोई ध्यान दिया।-राजेंद्र शर्मा, स्थानीय निवासी