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अब सांस रोगियों के संक्रमण से बच सकेंगे डॉक्टर, जल बोर्ड के कर्मचारी संक्रमित
Fri, 29 May 2020 05:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 29 May 2020 05:59 AM IST
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पूर्वी दिल्ली नगर निगम के स्वामी दयानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने सांस के गंभीर मरीजों के गले में ट्यूब डालने के लिए एक खास मॉडल तैयार किया है। इसकी सहायता से डॉक्टरों को नली डालते समय मरीजों के सीधे संपर्क में नहीं आना पड़ेगा, जिससे कोरोना संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा।
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अस्पताल के आईसीयू इंचार्ज डॉ. प्रसनजीत चटर्जी बताते हैं कि ये मॉडल एक्रेलिक प्लास्टिक से बनाया गया है। इससे मरीज का चेहरा ढक जाता है। इसमें एक तरफ डॉक्टर की जांच करने के लिए दो छेद बनाए गए हैं। इनकी सहायता से डॉक्टर सांस के मरीजों के गले में आसानी से ट्यूब डाल सकेंगे। कोरोना वायरस को लेकर अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार ये गले से सांस, छींक और खांसी के साथ निकलने वाले थूक के महीन कणों के जरिए तेजी से फैलता है। जिन मरीजों को सांस की बीमारी होती है उनके गले में ट्यूब डालना डॉक्टरों के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। डॉक्टरों को संक्रमण से बचने के लिए यह खास मॉडल बनाया गया है।
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कोयला मंत्रालय के अनुभाग अधिकारी की मौत
कोरोना संक्रमण के कारण बुधवार को कोयला मंत्रालय के अनुभाग अधिकारी की मौत हो गई है। उनके संपर्क में रहे अन्य लोगों की पहचान कर होम क्वारंटीन कर दिया गया है। इसके साथ ही मंत्रालय में संयुक्त सचिव व इससे उच्च स्तर के आलाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को दो मिनट का मौन रख उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
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हिंदूराव में स्वास्थ्य कर्मियों को नहीं मिला इलाज
राजन बाबू टीबी अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों ने कोरोना की जांच के लिए सुनवाई न करने पर हिंदूराव अस्पताल पर आरोप लगाया है। इसको लेकर बृहस्पतिवार को एक वीडियो भी काफी वायरल हुआ। इसमें अस्पताल के नर्स बता रहे हैं कि वह किसी कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आ गए थे, जिसके बाद उनकी तबीयत खराब हुई तो वह हिंदूराव अस्पताल में जांच के लिए पहुंचे। वहां उन्हें कुछ देर रुकने के लिए कहा गया। आरोप है कि देर शाम तक भी उनका टेस्ट नहीं किया गया। इस वजह से उनकी तबीयत और बिगड़ गई। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि यदि स्वास्थ्यकर्मियों को ही अस्पताल में इलाज नहीं मिल रहा है तो अन्य लोगों को कैसे इलाज मिलेगा? स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से कहा जा रहा है कि उन्होंने बिना पीपीई किट के एक मरीज को इंजेक्शन लगाया था, जिसके बाद वह संक्रमित हो गए।
जल बोर्ड के तीन कर्मचारी संक्रमित
दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर वरुणालय में कानून अधिकारी के कार्यालय में काम करने वाले तीन कर्मचारी कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसके बाद दूसरी मंजिल को सील कर दिया गया है। 30 मई के बाद दूसरी मंजिल को सैनिटाइजेशन के बाद खोला जाएगा।
बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की तबीयत खराब थी और जब उनका कोरोना टेस्ट कराया गया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद दफ्तर की दूसरी मंजिल को सील कर दिया गया है। कर्मचारियों के संपर्क में रहने वाले अन्य कर्मचारियों की पहचान की जा रही है।