सुप्रीम कोर्ट में लगाई अर्जी, इस दीवाली न बजें पटाखें
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दिवाली आने वाली है और त्यौहारों के लिए सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में ही देखने को मिलता है लेकिन, क्या आप यकीन करेंगे कि बच्चों ने देश की सर्वोच्च अदालत से मांग की है कि इस दीपावली में पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाए।
दिल्ली में तीन से 14 साल की उम्र के तीन बच्चों ने अपने परिजनों की मदद से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मांग की है कि दिवाली या अन्य मौकों पर दिल्ली में पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाए।
अपने मां-बाप के माध्यम से पीआईएल दाखिल करने वाले तीनों बच्चों अर्जुन गोयल, अरव भंडारी और जोया राव ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि पटाखों पर रोक लगाई जाए जिससे कि वो स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण में जीने के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
याचिका में कहा गया है कि बच्चों के विकास और उन्नति के लिए ऐसे पर्यावरण का होना जरूरी है जिसमें कम से कम हवा शुद्घ हो और सांस लेने से बिमारी होने का खतरा न हो।
क्यों बच्चों के लिए खतरनाक हो गया है ये शहर
बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान उस निर्देश की ओर भी खींचा है जिसमें सरकारों से तेज आवाज वाले पटाखों की ब्रिकी पर नियंत्रण की बात कही गई है और इसके बावजूद रोक के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण की ओर इशारा करते हुए याचिका में बताया गया है कि पिछले दो साल से दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।
याचिकाकर्ता बच्चों का कहना है कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है क्योंकि इससे उनके फेफड़े का संपूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है और इसका विपरीत असर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी हो रहा है।
क्यों की पटाखों पर रोक की मांग
पीआईएल में बताया गया है कि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण आस-पास के राज्यों में 500 मिलियन टन फसलों का जलाया जाना है। इसके अलावा रात में ट्रकों और वाहनों के आवागमन से उड़ने वाली धूल भी इसके लिए उतनी ही जिम्मेदार है।
बच्चों का कहना कि अक्टूबर और नवंबर के महीने में दशहरा और दिवाली की वजह से प्रदूषण का यह स्तर और भी खतरनाक हो जाता है क्योंकि इस दौरान भारी मात्रा में पटाखों के इस्तेमाल से सांस लेना दूभर हो जाता है।
बच्चो ने कोर्ट से गुहार लगाते हुए कहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल की तुरंत आवश्यकता है क्योंकि प्रदूषण के स्तर ने दिल्ली के पर्यावरण को विषैला बना दिया है और यहां के लोग इस हवा में जीने के लिए मजबूर हैं।