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सुप्रीम कोर्ट में लगाई अर्जी, इस दीवाली न बजें पटाखें

Wed, 30 Sep 2015 10:48 PM IST
Updated Wed, 30 Sep 2015 10:48 PM IST
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three toddlers file pil in supreme court to ban firecrackers

दिवाली आने वाली है और त्यौहारों के लिए सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में ही देखने को मिलता है लेकिन, क्या आप यकीन करेंगे कि बच्चों ने देश की सर्वोच्च अदालत से मांग की है कि इस दीपावली में पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाए।

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दिल्ली में तीन से 14 साल की उम्र के तीन बच्चों ने अपने परिजनों की मदद से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मांग की है कि दिवाली या अन्य मौकों पर दिल्ली में पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाए।
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अपने मां-बाप के माध्यम से पीआईएल दाखिल करने वाले तीनों बच्चों अर्जुन गोयल, अरव भंडारी और जोया राव ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि पटाखों पर रोक लगाई जाए जिससे कि वो स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण में जीने के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
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याचिका में कहा गया है कि बच्चों के विकास और उन्नति के लिए ऐसे पर्यावरण का होना जरूरी है जिसमें कम से कम हवा शुद्घ हो और सांस लेने से बिमारी होने का खतरा न हो।

क्यों बच्चों के लिए खतरनाक हो गया है ये शहर

three toddlers file pil in supreme court to ban firecrackers

बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान उस निर्देश की ओर भी खींचा है जिसमें सरकारों से तेज आवाज वाले पटाखों की ब्रिकी पर नियंत्रण की बात कही गई है और इसके बावजूद रोक के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण की ओर इशारा करते हुए याचिका में बताया गया है कि पिछले दो साल से दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।

याचिकाकर्ता बच्चों का कहना है कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है क्योंकि इससे उनके फेफड़े का संपूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है और इसका विपरीत असर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी हो रहा है।

क्यों की पटाखों पर रोक की मांग

three toddlers file pil in supreme court to ban firecrackers

पीआईएल में बताया गया है कि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण आस-पास के राज्यों में 500 मिलियन टन फसलों का जलाया जाना है। इसके अलावा रात में ट्रकों और वाहनों के आवागमन से उड़ने वाली धूल भी इसके लिए उतनी ही जिम्मेदार है।

बच्चों का कहना कि अक्टूबर और नवंबर के महीने में दशहरा और दिवाली की वजह से प्रदूषण का यह स्तर और भी खतरनाक हो जाता है क्योंकि इस दौरान भारी मात्रा में पटाखों के इस्तेमाल से सांस लेना दूभर हो जाता है।

बच्चो ने कोर्ट से गुहार लगाते हुए कहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल की तुरंत आवश्यकता है ‌क्योंकि प्रदूषण के स्तर ने दिल्ली के पर्यावरण को विषैला बना दिया है और यहां के लोग इस हवा में जीने के लिए मजबूर हैं।

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