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सिविल अस्पताल के बाथरूम में तीन बच्चों का जन्म

Wed, 28 Jan 2015 08:10 PM IST
Updated Wed, 28 Jan 2015 08:10 PM IST
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three infants died in hospital's bathroom

सिविल अस्पताल के बाथरूम में मंगलवार देर रात तीन बच्चों के जन्म का मामला सामने आया है। बाथरूम में हुई डिलीवरी में एक बच्चे का सिर बाथरूम के पैन में फंस गया था।

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मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और स्टाफ नर्स पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। खफा परिजनों ने बुधवार को अस्पताल में हंगामा भी किया।
    
जानकारी के मुताबिक, खेड़की माजरा की रहने वाली कमलेश ने अस्पताल के बाथरूम में जुड़वा और बादशाहपुर की प्रीति ने एक बच्ची को जन्म दिया।

कमलेश के पति सुंदर का आरोप है कि मंगलवार रात करीब 11 बजे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन प्रसव पीड़ा से कराह रही कमलेश को उपचार करने के बजाय उल्टा दुत्कार रहे थे। जब वो बाथरूम गई तो 12 बजकर 35 मिनट पर एक बच्ची को जन्म दिया।
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उसे बाद में वार्ड के अंदर ले जाया गया। करीब डेढ़ बजे उसने दूसरी बच्ची को जन्म दिया। कमलेश की सास गुड्डी देवी ने बताया कि मौजूद स्टाफ ने दुत्कारते हुए प्राइवेट अस्पताल में ले जाने को कहा था।
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बादशाहपुर के रहने वाली प्रीति के पति कंवरपाल का आरोप है कि रात करीब दस बजे प्रसव पीड़ा होने पर पहले बादशाहपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए, लेकिन वहां उसे उपचार करने के बजाय सिविल अस्पताल रेफर कर दिया।

यहां किसी तरह ऑटो में लेकर आए, लेकिन भर्ती के बाद डॉक्टरों ने कहा कि अभी डिलीवरी होने में बहुत समय है। जब वह बाथरूम गई तो वहां करीब पौने तीन बजे बच्चे को जन्म दिया।

महिला मरीजों को बाथरूम जाने से मना किया

three infants died in hospital's bathroom
स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिला और प्रसुति के लिए लगातार बेहतर इंतजाम करने का दावा कर रहा है, लेकिन मंगलवार रात की घटना ने इस पर सवाल खड़े कर दिए।

बादशाहपुर से आए कंवरपाल का कहना है कि पीएचसी में जाने के बावजूद न तो एंबुलेंस मुहैया कराई गई और न ही उनके साथ कोई आशा वर्कर आई। जबकि नियम के मुताबिक पीएचसी से गर्भवती महिलाओं को रेफर करने के लिए एंबुलेंस के जरिए भेजा जाना जरूरी है। साथ ही एक आशा वर्कर भी साथ होगी।

बता दें कि जननी स्वास्थ्य सप्ताह के तहत पूरे जिले में गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई थी। उन्हें हाई रिस्क कैटेगरी में पहचान कर बेहतर उपचार करने का दावा किया गया था।

डॉक्टरों ने महिला मरीजों को बाथरूम जाने से मना किया था। डिलीवरी के वक्त बाथरूम लगना और वहीं डिलीवरी होने की संभावना बनी होती है। डॉक्टरों के आदेश को नजरअंदाज कर जाने की वजह से इस तरह का मामला हुआ है।
डॉ. प्रदीप शर्मा, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी
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