Delhi: बड़े थोक विक्रेताओं के साथ ठगी में बैंक मैनेजर समेत तीन गिरफ्तार, फर्जी कंपनियों के जरिए करते थे वारदात
पकड़े गए आरोपियों की पहचान संभल, यूपी निवासी नूर मोहम्मद, मनीष सैमसन और धर्मवीर चड्ढा उर्फ रिमपल चड्ढा के रूप में हुई है। इनसे पूछताछ में अब तक छह फर्जी कंपनियों का पता चला है। इनके जरिये आरोपियों ने चंद ही दिनों में 1.63 करोड़ की ठगी की है।
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फर्जी कंपनियां खोलकर थोक कारोबारियों के साथ ठगी करने वाले एक गिरोह का उत्तरी जिला के साइबर थाना पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में निजी बैंक के मैनेजर समेत तीन आरोपियों को दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान संभल, यूपी निवासी नूर मोहम्मद, मनीष सैमसन और धर्मवीर चड्ढा उर्फ रिमपल चड्ढा के रूप में हुई है। इनसे पूछताछ में अब तक छह फर्जी कंपनियों का पता चला है।
इनके जरिये आरोपियों ने चंद ही दिनों में 1.63 करोड़ की ठगी की है। पुलिस को मामले में इनके दो अन्य साथी अमन कपूर और राजेंद्र अरोड़ा की तलाश है। आरोपियों के पास से 51 चेक बुक, 28 डेबिट कार्ड, भारी मात्रा में फर्जी आईडी, 10 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, ठगा गया लाखों का खेल का सामान, घरेलू व अन्य सामान बरामद किया है।
बुराड़ी निवासी संदीप कुमार नामक कारोबारी ने पुलिस को तीन लाख की ठगी की शिकायत दी थी। पीड़ित ने बताया कि उनका फैंसी फर्नीचर का कारोबार है। उन्होंने अपनी कंपनी को इंडियामार्ट पर रजिस्टर कराया हुआ है। पिछले दिनों उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉलर फिरोज ने लैपटॉप टेबल और स्टूल लेने की इच्छा जताई। बातचीत के बाद आरोपी फिरोज ने करीब तीन लाख का ऑर्डर देकर सदर बाजार के पते पर माल मंगा लिया। पीड़ित को ऑन लाइन पेमेंट कर उसकी रसीद भी भेज दी गई, लेकिन पेमेंट नहीं पहुंचा। उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त मनोज कुमार मीना ने बताया कि पीड़ित संदीप सदर बाजार के पते पर पहुंचे तो वहां का दफ्तर खाली मिला। पीड़ित की शिकायत पर उत्तरी जिला के साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
ऐसे पकड़े गए आरोपी
पुलिस ने सबसे पहले टेक्निकल सर्विलांस की मदद से जांच शुरू की तो कॉलर की लोकेशन निहाल विहार डी-ब्लॉक की मिली। आरोपी वहां से भी गायब मिला। काफी पड़ताल के बाद उसकी लोकेशन ए-ब्लॉक निहाल विहार की मिली। महिला हवलदार सोनिका को कूरियर डिलीवरी के नाम पर उस पते पर भेजा गया। इशारा मिलने पर टीम ने आरोपी को दबोच लिया। आरोपी की पहचान नूर मोहम्मद उर्फ फिरोज के रूप में हुई। उसकी निशानदेही पर बाकी दोनों आरोपी मनीष सैमसन और धर्मवीर चड्ढा को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
ऐसे की जाती थी ठगी
मनीष निजी बैंक में मैनेजर है। वह बैंक में आए ग्राहकों के दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियां और बैंक खाते खोल लेता है। इसके बाद उस कंपनी के नाम से एक किराए की जगह लेकर वहां एक या दो माह के लिए उसका ऑफिस खोला जाता है। इंडिया मार्ट से रजिस्टर थोक कारोबारियों से संपर्क कर उनसे माल खरीदा जाता है। ऑन लाइन पेमेंट के नाम पर उनको फर्जी रसीद भेज दी जाती है। सामान को फर्जी कंपनी के नाम और पते पर मंगाया जाता है। जब तक पीड़ित को ठगी का पता चलता है कि आरोपी माल समेत वहां से फरार हो जाते हैं। बाद में इस माल को मार्केट में बेच दिया जाता है।
अमन संभालता है मैनेजर का काम
अमन कपूर हमेशा दफ्तर में मैनेजर का काम संभालता है, उसकी अंग्रेजी बेहतर है। इसके अलावा रिमपल और नूर मोहम्मद का काम फर्जी कंपनियों के लिए अस्थाई दफ्तर का इंतजाम करना है। एक अन्य आरोपी राजेंद्र अरोड़ा का काम ठगे गए सामान को मार्केट में बेचना है। उसके बाद ठगी की रकम को आपस में बांट लिया जाता हैं। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर इनके बाकी साथियों की तलाश कर रही है।