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चुनाव से पहले दिल्ली में भाजपा ने की 'बड़ी भूल'

Sun, 16 Nov 2014 05:12 PM IST
Updated Sun, 16 Nov 2014 05:12 PM IST
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Those standing in the party lost Delhi BJP.

दिल्ली भाजपा पुराने नेताओं को भूल गई लगती है। राष्ट्रीय नेतृत्व वाले नेता तो याद रहे लेकिन जनसंघ के समय से ही दिल्ली में पार्टी को खड़ा करने वाले नेताओं को भुला दिया गया है। पार्टी की नए कलेवर शुरू हुई वेबसाइट से इसका पता चलता है।

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वेबसाइट पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन दिल्ली के नेताओं की बात करें तो मदनलाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा, सुषमा स्वराज व केदारनाथ साहनी गायब हैं।
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जबकि दिल्ली में आज भी खुराना, साहनी और वीके मल्होत्रा का नाम ट्रायो के रूप में बेहद ही मशहूर है। ये वे नेता हैं जिन्होंने दिल्ली में पार्टी को खड़ा किया है। जानकार बताते हैं कि तीनों जनसंघ के जमाने से ही पार्टी के लिए साइकिल से प्रचार करके घर-घर जाकर सदस्य बनाते थे।
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वहीं, पंत मार्ग स्थित प्रदेश कार्यालय में भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, आडवाणी-अटल के फोटो देखने को तो मिलते हैं, लेकिन दिल्ली में पार्टी को खड़ा करने वाले नेताओं की तस्वीरें यहां भी नदारद हैं।

मोदी फॉर्मूले पर चले केजरीवाल?

Those standing in the party lost Delhi BJP.

दिल्ली के दंगल में मैदान मारने के लिए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विकास के मोदी फॉर्मूले को अपना लिया है। दिल्ली डायलॉग में केजरीवाल का शनिवार को फोकस विकास ही रहा।

केजरी ने अपना भाषण 49 दिनों की ‘आप’ सरकार के दौरान किए गए कामों से शुरू किया। उनका भी जोर मोदी की ही तरह तकनीकी, कौशल विकास, शिक्षा पर रहा। सिर्फ शैक्षिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि हुनर को निखारने पर जोर दिया।

केजरीवाल ने ग्लोबल दिल्ली और हर हाथ में इंटरनेट देने की बात भी कही। जिसकी वकालत मोदी पहले से ही करते रहे हैं। केजरीवाल ने अपने पूरे भाषण के दौरान सिर्फ दिल्ली में विकास की बात कही। उनका जोर युवाओं को हुनरमंद बनाकर अपना काम शुरू करने पर रहा। इस दौरान उन्होंने न तो केंद्र सरकार और न ही मोदी पर हमला बोला। उन्होंने एक बार जरूर महंगाई के नाम पर हमला बोला, मगर मोदी का नाम नहीं लिया।

आम आदमी पार्टी के नेता यह भले ही नहीं मानते हों,  मगर अब लगता है कि आप संयोजक मान चुके हैं कि विकास के मुद्दे पर ही चुनाव लड़कर वह दिल्ली की नैया पार की जा सकती है। इस दौरान सिर्फ आप के सांसद भगवंत मान को छोड़ दें तो पार्टी का हर नेता सीधे मोदी पर हमला बोलने से बचता रहा।

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