दिल्ली का ये 'ट्रिपल लेयर मॉडल' कोरोना से लड़ने में होगा कामयाब, सभी संक्रमितों को मिल सकेगा इलाज
- *17386 मामले होने पर भी केवल 2169 अस्पतालों में भर्ती
- पांच जून तक अस्पतालों में 9500 बिस्तरों के करने की तैयारी
- मौजूदा दर में केवल 23.72 फीसदी मरीजों को ही अस्पताल की सुविधा
विस्तार
क्या दुनिया के कई शहरों की तरह दिल्ली में भी कोरोना के मामले इस हद तक बढ़ जाएंगे कि सभी लोगों को इलाज मिलना मुश्किल हो जाएगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली ने इलाज का जो 'तीन स्तरीय मॉडल' अपनाया है, उसके तहत भारी संख्या में कोरोना के मामले सामने आने के बाद भी लोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकेगा।
इसलिए अगर संख्या एक हद तक बढ़ती भी है, तो भी यह बड़ी चिंता की बात नहीं है। इस समय के 9142 सक्रिय कोविड मामलों में अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या केवल 2169 या कुल का 23.72 फीसदी है।
यानी एक चौथाई से भी कम मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराने की जरूरत पड़ रही है। सरकार पांच जून तक बेड की संख्या बढ़ाकर 9500 तक करने की तैयारी कर रही है।
अगर गंभीर मामलों की संख्या इस रफ्तार से भी बढ़ती है, तो भी यह लगभग 40 हजार सक्रिय मरीजों की सुविधा के लिए पर्याप्त होगा। वहीं, कुल मरीजों (Cumulative) के हिसाब से यह सुविधा 76 हजार से भी अधिक मरीजों के लिए पर्याप्त होगा।
यही कारण है कि स्वास्थ्य अधिकारी दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों से बहुत परेशान नहीं हैं।
क्या है दिल्ली का तीन स्तरीय मॉडल
दिल्ली सरकार ने कोरोना के मामलों से निबटने के लिए अब तीन स्तरीय मॉडल अपनाया है। पहले सभी लोगों को अस्पतालों और क्वारंटीन सेंटरों में रखकर इलाज किया जा रहा था, लेकिन अब लक्षण न होने वाले मरीजों या कम लक्षण वाले मरीजों को उनके घरों पर रखकर ही होम आइसोलेशन में इलाज करने की सुविधा दी जा रही है।
इससे सबसे ज्यादा संख्या में मरीजों को इलाज मिल पा रहा है।
दूसरे स्तर पर कुछ गंभीर मरीजों को सरकार के क्वारंटीन सेंटरों, कोविड हेल्थ सेंटरों पर रखकर इलाज कराया जा रहा है। इसके बाद केवल बेहद गंभीर लक्षण वाले लोगों को ही अस्पतालों में रखकर इलाज किया जा रहा है।
इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को उनके लिए 'उपयुक्त' इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
बीएल कपूर अस्पताल के डॉक्टर संदीप नायर कहते हैं कि कोरोना से निबटने का यह बिल्कुल सही तरीका है। बिल्कुल कम इलाज की आवश्यकता वाले मरीजों को अस्पताल में रखने से ज्यादा जरूरत वाले मरीजों को उपयुक्त इलाज नहीं मिल पाता।
ऐसे में यही उचित है कि सरकार केवल गंभीर रोगियों को ही अस्पतालों में भर्ती करे।
दिल्ली ने बढ़ाई इलाज की क्षमता
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली ने लगातार अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा किया है। इस समय दिल्ली सरकार के विभिन्न अस्पतालों में 6600 बेड की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है।
पांच जून तक बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 9500 तक हो जाएगी। कई होटलों और अस्पतालों को भी कोविड सेवाओं के लिए चुना गया है जिससे सरकार की इस क्षमता में खासी बढ़ोतरी हो जाएगी।
दिल्ली में 15 अस्पतालों को कोविड अस्पतालों की कैटेगरी में रखा गया है। इनमें तीन दिल्ली सरकार के अस्पताल लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल, गुरु तेगबहादुर अस्पताल और राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शामिल हैं।
इसके अलावा केंद्र सरकार के चार अस्पताल- एम्स, सफदरजंग, डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। इसके अलावा आठ प्राइवेट अस्पतालों को भी कोविड मरीजों के इलाज के लिए नामित किया गया है।
सरकारी अस्पतालों में इलाज की क्षमता-
- लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल- 2000
- गुरु तेग बहादुर अस्पताल- 1500 (काम जारी)
- एम्स- 750
- राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल- 500
- डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल- 172
- सफदरजंग अस्पताल- 350
- लेडी हार्डिंग अस्पताल- 60
प्राइवेट अस्पतालों में क्षमता-
- सर गंगाराम सिटी- 120
- सर गंगाराम कोलमेट- 35
- मैक्स साकेत- 212
- बत्रा अस्पताल- 50
- इंद्रप्रस्थ अपोलो- 92
- फोर्टिस शालीमार बाग- 47
- मां दुर्गा चैरिटेबल ट्रस्ट- 100
- सिग्नस अस्पताल- 40
इसके अलावा 50 बिस्तर से अधिक क्षमता वाले 117 अस्पतालों में बीस फीसदी सीटों को कोविड मरीजों के लिए सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। अनुमान है कि इससे लगभग दो हजार अतिरिक्त बेड की व्यवस्था हो जाएगी।
प्राइवेट अस्पतालों में न्यूनतम 72 वेंटीलेटर्स की व्यवस्था है, तो सरकारी अस्पतालों में 250 वेंटीलेटर्स की सुविधा उपलब्ध है।
गुरु तेग बहादुर अस्पताल को छोड़कर बाकी अस्पतालों में न्यूनतम 3180 बेड्स पर ऑक्सीजन सुविधा उपलब्ध है। गुरु तेग बहादुर को जोड़ने के बाद इस क्षमता में काफी वृद्धि होने का अनुमान है जिससे कोरोना मरीजों के इलाज में विशेष सुविधा रहेगी।
कोरोना टेस्टिंग की सुविधा
दिल्ली में कोरोना टेस्ट (RT-PCR Test) की सुविधाओं में तेज बढ़ोतरी हुई है। इस समय दिल्ली के 34 अस्पतालों/लैब्स में कोरोना टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसमें 15 सरकारी और 19 प्राइवेट अस्पताल/लैब सेंटर शामिल हैं।
इसके अलावा दिल्ली का सैंपल नोएडा की एक लैब को भी भेजा जाता है। दिल्ली ने अब तक लगभग दो लाख टेस्ट कर लिए हैं। अब मास लेवल पर टेस्टिंग की तैयारी है।