फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   This time the Delhi government emerged from the corporation

Delhi Government : अबकी बार निगम से निकली दिल्ली सरकार, गठन में क्षेत्रीय और जातीय समूहों को साधने की कोशिश

Fri, 21 Feb 2025 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 21 Feb 2025 06:03 AM IST
सार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और तीन कैबिनेट मंत्रियों का निगम से सीधा ताल्लुक रहा है। इनमें आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा और डॉ. पंकज सिंह भी शामिल हैं। चारों निगम में पार्षद रहे हैं।

विज्ञापन
This time the Delhi government emerged from the corporation
दिल्ली सरकार में हुए विभागों के बंटवारे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की नई सरकार में नगर निगम का जलवा रहा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और तीन कैबिनेट मंत्रियों का निगम से सीधा ताल्लुक रहा है। इनमें आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा और डॉ. पंकज सिंह भी शामिल हैं। चारों निगम में पार्षद रहे हैं। बाकी तीन मंत्री परोक्ष तौर पर निगम से जुड़े हैं। प्रवेश वर्मा के पिता और कपिल मिश्रा की माता निगम पार्षद रही हैं। वहीं, मंत्री रविंद्र इंद्राज के पिता बतौर विधायक एमसीडी में मनोनीत हुए थे। निगम के अनुभव ने इन नेताओं को दिल्ली की सियासत में अपनी पहचान बनाने में मदद की।

विज्ञापन


मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वर्ष 2007 के दौरान एमसीडी से अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी। वहां से उन्हें एक मजबूत राजनीतिक आधार मिला। वहीं, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा व डाॅ. पंकज सिंह ने भी वर्ष 2007 में एमसीडी से राजनीतिक पारी शुरू की थी। निगम में रहते हुए राजनीति की बारीकियां समझीं और इसके बाद उन्हें दिल्ली विधानसभा का टिकट मिला। हालांकि, सिरसा तीसरी बार विधायक बने हैं।
विज्ञापन


वर्ष 2013 व 2017 में भी विधायक चुने गए थे। मंत्री आशीष सूद ने वर्ष 2012 में एमसीडी के पार्षद के तौर पर पहली बार जनप्रतिनिधि किया था। इस दौरान उन्होंने राजनीति में अपनी जमीन मजबूत की। मंत्री प्रवेश वर्मा के पिता साहिब सिंह वर्मा एमसीडी के पार्षद रहे थे और उन्होंने वहां से राजनीति में अपनी खास पहचान बनाई थी। वे उपनेता प्रतिपक्ष भी रहे थे। इसके बाद वह दिल्ली सरकार में मंत्री व मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री बने।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि, प्रवेश वर्मा ने कभी भी पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा। वे दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। इसके अलावा वह दो बार सांसद भी रह चुके हैं। इसी तरह मंत्री कपिल मिश्रा की मां अन्नपूर्णा मिश्रा पार्षद के साथ-साथ पूर्वी दिल्ली निगम की मेयर रह चुकी हैं। इस दौरान कपिल मिश्रा अपनी मां का काम देखते थे। हालांकि, वे बाद में आप में शामिल हो गए। इसके बाद आप की दूसरी सरकार में विधायक बने और मंत्री भी बनाया गया।

भाजपा सरकार में मंत्री रविंद्र व उनके पिता का एमसीडी से सीधा संबंध नहीं रहा था, लेकिन पिता नरेला क्षेत्र से 1993 से 1998 तक विधायक रहे थे और दिल्ली सरकार ने उन्हें एमसीडी में मनोनीत किया था। इस दौरान वे एमसीडी के विभिन्न पहलुओं से जुड़े हुए थे। दिल्ली विधानसभा के 20 प्रतिशत सदस्य हर साल एमसीडी में मनोनीत होते हैं, जो पार्टी को स्थानीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। इस प्रकार एमसीडी से जुड़े हुए नेताओं व उनके बच्चों ने दिल्ली की राजनीति में अपनी जगह मजबूत की है।

क्षेत्रीय व जातीय समूहों को साधने की कोशिश की
नई सरकार से भाजपा ने दिल्ली के क्षेत्रीय व जातीय समूहों को साधने की कोशिश की है। रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर न सिर्फ महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया है, बल्कि कैडर वोट रहे वैश्य समुदाय को सरकार में कमान सौंप दी है। यह वैश्य बिरादरी के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि लगातार चौथी बार वैश्य नेता को मुख्यमंत्री पद मिला है। इससे पहले केजरीवाल लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बने थे। भाजपा ने इस बार सामाजिक समीकरणों का ध्यान रखते हुए रेखा को शीर्ष पद पर बिठाया।

भाजपा ने पूर्वांचल और जाट समुदाय के दो-दो विधायकों को मंत्री पद दिया। इन दोनों वर्गों से उसने कई जातियों को भी साधा। पूर्वांचल से डॉ. पंकज सिंह (राजपूत) और कपिल मिश्रा (ब्राह्मण) को मंत्री बनाया गया, जबकि जाट समुदाय से प्रवेश वर्मा और मनजिंदर सिंह सिरसा (सिख जाट) को मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया। इस फैसले से भाजपा ने इन प्रमुख समुदायों का भरोसा जीतने की कोशिश की है। इससे साफ है कि भाजपा ने अपने कोर वोटर को भी संतुष्ट किया है। साथ में यहां की डेमोग्राफी में हो रहे बदलाव से जिस तरह पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाले लोग प्रभावी हुए हैं, उन्हें भी साधने की कोशिश की है। इसमें जातीय समीकरण की भी अनदेखी नहीं की गई है। पंजाबी और अनुसूचित जाति समुदाय को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। पंजाबी वर्ग से आशीष सूद और अनुसूचित जाति से रविंद्र इंद्राज मंत्री बनाया गया है।

आप की पिछली सरकार में पंजाबी और सिख समुदाय के नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला था, लेकिन भाजपा ने इस खामी को दूर किया। इस तरह भाजपा ने सामाजिक समीकरणों और जातीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल का गठन किया। उसका यह कदम आगामी एमसीडी व अन्य चुनाव में उसकी राजनीतिक स्थिति को मजबूत कर सकता है।

नई सरकार में पश्चिमी दिल्ली ने मारी बाजी
दिल्ली सरकार में पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व मिला है, जबकि पूर्वी व दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र मंत्री पद के मामले में खाली रह गए हैं। वहीं, चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र को मुख्यमंत्री, उत्तर पश्चिमी लोकसभा क्षेत्र, नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र व उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र को एक-एक मंत्री पद मिला है।


दिल्ली के संसदीय क्षेत्र के हिसाब से दिल्ली की नई सरकार को देखने पर पता चलता है कि पश्चिमी दिल्ली का इसमें सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। तीन विधायक मंत्री बनने में कामयाब रहे हैं। इसमें आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा व डॉ. पंकज सिंह शामिल हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का विधानसभा क्षेत्र चांदनी चौक संसदीय सीट का हिस्सा है। वहीं, उत्तर पूर्वी दिल्ली से कपिल मिश्रा, नई दिल्ली से प्रवेश वर्मा, उत्तर पश्चिमी दिल्ली से रविंद्र इंद्राज मंत्रिमंडल में पहुंचने में कामयाब रहे हैं। दिलचस्प यह कि पूर्वी दिल्ली व दक्षिणी दिल्ली इस मामले में घाटे में रही हैं। दोनों संसदीय क्षेत्रों की बीस विधानसभा सीटों में से 13 पर काबिज भाजपा का एक भी विधायक मंत्री बनने में कामयाब नहीं हो सका है। हालांकि, पूर्वी दिल्ली से सांसद हर्ष मल्होत्रा केंद्र सरकार में बतौर राज्य मंत्री काम कर रहे हैं।

लोकसभा सीट और सरकार में प्रतिनिधित्व
पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र

10 सीटों में से 9 पर भाजपा काबिज। जनकपुरी से विधायक आशीष सूद, राजौरी गार्डन से मनजिंदर सिंह सिरसा व विकासपुरी से डॉ. पंकज सिंह बने मंत्री।

चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र
10 सीटों में से 6 पर भाजपा काबिज। शालीमार विधायक रेखा गुप्ता बनीं मुख्यमंत्री।

उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा क्षेत्र 
10 विधानसभा सीटों में से आठ पर भाजपा। बवाना से विधायक रविंद्र इंद्राज बने मंत्री।

नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र
10 में से सात पर भाजपा काबिज। विधायक प्रवेश वर्मा बने मंत्री।

उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र:
10 में से पांच सीटों पर भाजपा के काबिज। करावल नगर से कपिल मिश्रा बने मंत्री।

पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र :
दस में से आठ सीटों पर भाजपा काबिज। नहीं मिला मंत्रिमंडल में हिस्सा।

दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र :
10 में से पांच सीटों पर भाजपा काबिज। मंत्रिमंडल में नहीं मिली भागीदारी।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed