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4 साल से यहां पेड़ के नीचे लगती हैं कक्षा
अख्तर अलवी/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Tue, 08 Sep 2015 07:20 PM IST
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शिक्षा के क्षेत्र में अति पिछडे़ मेवात में प्रदेश सरकार एवं शिक्षा विभाग मेवात को प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रयासरत है, वहीं दूसरी तरफ मेवात जिले के फिरोजपुर झिरका शहर की सुभाष कॉलोनी स्थित प्राथमिक स्कूल पिछले चार सालों से भवन के अभाव में पेड़ के नीचे चल रहा है। इस स्कूल में करीब 100 बच्चों पर दो अध्यापक कार्यरत हैं।
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यहां सवाल यह उठता है कि जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक तथा खंड शिक्षा अधिकारी स्कूलों के लगातार निरीक्षण कर स्कूलों की मासिक रिपोर्ट सरकार एवं विभाग को सौंप रहे हैं। फिर भी उनकी नजरों में यह स्कूल अब तक क्यों नहीं आया।
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खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से कुछ ही दूरी पर शहर के वार्ड नंबर तीन में अब से चार वर्ष पूर्व जिला शिक्षा विभाग ने राजकीय प्राथमिक पाठशाला को खोला था।
पहली से पांचवी तक के इस स्कूल में गरीब एवं असहाय बच्चों के दाखिले कराए गए थे। लेकिन आज चार वर्ष बीत जाने के बाद भी इस स्कूल को अपना कोई भवन नहीं मिल सका है। जिला शिक्षा विभाग ने आज तक स्कूल का भवन बनवाने में कोई दिलचस्पी दिखाई है।
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स्कूल का अपना भवन न होने के चलते स्कूल के नौनिहाल पिछले चार सालों से नीम के पेड़ के नीचे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। वहीं स्कूल में अन्य संसाधनों की कमी के चलते बच्चे स्कूल आने से कतराने लगे हैं।
स्कूल में शौचालय भी नहीं है। जिसके चलते यहां लड़कियां स्कूल आने से कतराती हैं। कई लड़कियों ने अपना नाम कटवाकर दूसरे स्कूलों में दाखिला ले लिया है।
स्कूल का अपना भवन नहीं होने के चलते बरसात के दिनों में स्कूल को बंद करना पड़ता है। अगर बारिश कई दिनों तक जारी रहती है तो छुट्टी भी कई दिनों चलती है। इसके अलावा स्कूल में बिजली तथा पीने के पानी तथा मिड-डे मील का खाना पकाने के लिए रसोई घर जैसे साधन भी नहीं हैं, जिससे खुले में खाना पकाया जाता है।
इस स्कूल को अब किसी अन्य स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा।-वजीर चंद मजौका, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
क्षेत्र के समाजसेवी डॉ. असफाक आलम, यूसुफ एड़वोकेट, हमारा अधिकार मोर्चा के सदस्य जफरुदीन बाघोड़िया, आमीन खान, मौलाना ताहिर हुसैन का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार एवं मौजूदा सरकार ने मेवात में शिक्षा की बेहतरी के लिए अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है, जिससे मेवात जैसा पिछडा क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।