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हद हो गई... कम ही नहीं हो रही कतार
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 08 Dec 2016 01:34 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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सरकारी कर्मचारियों के वेतन के बाद अब गैरसरकारी संस्थाओं के कर्मचारियों का वेतन मिलने के बाद बुधवार को बैंक व एटीएम के बाहर लोगों की बढ़ती भीड़ से व्यवस्था चरमरा गई। उधारी का तकाजा शुरू हो गया है। घर की कामवाली हो या फिर दूध वाला। सब्जी भी लेना मुश्किल हो रहा है।
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बैंक और एटीएम तक में पैसे नहीं है फिर लोगों का घर खर्च कैसे चलेगा। यह चर्चाएं कतारों में खड़े उन लोगों की है जो कि पैसा निकालने के लिए कतारों में घंटों समय गुजार रहे हैं। लोगों की नाराजगी अब बाहर आने लगी है। वह अपने ही पैसों व घर खर्च को लेकर शुरू हुए तकादे से परेशान लोग अब व्यवस्था को जमकर कोस रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि ना तो एटीएम में पैसे हैं और बैंक में घंटों खड़े रहे तो पता चलता है कि कैश खत्म हो गया है। बैंक व एटीएम के बाहर कैश के लिए कतार की अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट...।
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जल्दी कुछ नहीं हुआ तो बढ़ सकती है मुश्किल
स्थान: प्रीत विहार
समय: सुबह 10 बजे
पूरा इलाका घूम लिया है। जगतपुरी कृष्णा नगर तक हो आया हूं कही एटीएम में पैसा नहीं है। तब जाकर अब बैंक की कतार में खड़ा हूं शायद अब यहां से कुछ मिल जाए। प्रीत विहार स्थित ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) की बैंक कतार में खड़े साहिल ने कहा कि अब तो हद हो गई है। 30 दिन हो गए, लेकिन एटीएम में कैश पूरा नहीं है। हर जगह कैश से पेमेंट होता नहीं बताओ हम क्या करे। कतार में खड़े सभी लोग साहिल से सहमति जताते हुए कहते हैं कि जल्दी कुछ ना हुआ तो मुश्किल बढ़ जाएगी।
कामवाली भी रोज तकादा कर रही है
स्थान: लक्ष्मी नगर
समय: दोपहर 11:30 बजे।
बैंक ऑफ बड़ौदा के बाहर लंबी कतार, महिलाओं की अलग व पुरुषों की अलग। शोर ऐसा कि बैंक कर्मचारी भी जब अंदर जाने लगा तो उसे भी रोक लिया। बैंक मैनेजर को लेने आना पड़ा। सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे इसलिए हथियारबंद आरएएफ के जवान बैंक के बाहर तैनात हैं। महिलाओं की कतार में चर्चा चल रही है। लाइन में खड़ी निशा कहती हैं कि कैश के चक्कर में हालत यह है कि अब तो कामवाली भी तकादा कर रही है। क्योंकि माह पूरा हो गया और कैश नहीं होने से पैसे नहीं दे पा रही हूं।
पत्नी ने बोला, आज पैसे लेकर ही आना
स्थान: यूको बैंक पटेल चौक
समय: दोपहर 1:00 बजे।
आज छुट्टी ली है क्योंकि पत्नी ने बोला है कि पैसे नहीं है। आज पैसे लेकर ही आना। इसलिए आज छुट्टी ली है। कतार में खड़े नीरज अपने आगे-पीछे वालों को यही बता रहे हैं। नीरज से बात की तो पता चला कि सैलरी पांच को ही आ गई थी। एक दिन 2000 रुपये निकला। मासिक खर्चों का भुगतान करना है। पैसे खत्म हो गए है। पत्नी की चेतावनी मिल गई इसलिए मंडावली से यहां आया हूं। क्योंकि वहां तो किसी एटीएम में पैसे ही नहीं है।