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क्लिक के नाम पर 40 हजार लोगों को ठगने वाले की ये 10 गलतियां बनीं CBI जांच का आधार

Wed, 03 May 2017 09:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Wed, 03 May 2017 09:16 PM IST
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these ten faults of web work company became basis of cbi investigation
- फोटो : अमर उजाला

वेबवर्क मामले में पुलिस जांच से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया। कंपनी पर करीब 40 हजार लोगों से 256 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। शिकायतकर्ता अमित किशोर जैन के अनुसार इस केस की जांच में नोएडा पुलिस ने 10 ऐसी खामियां की हैं, जिससे जांच सीबीआई को ट्रांसफर करनी पड़ी।

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अमित किशोर जैन का आरोप है कि इस केस को लेकर शुरू से ही पुलिस की मंशा ठीक नहीं थी। यही वजह है कि जब वह 4 फरवरी 2017 को पहली बार कंपनी के खिलाफ शिकायत लेकर नोएडा पुलिस के पास पहुंचे तो उन्हें भगा दिया गया।
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पुलिस ने उनकी पूरी बात तक नहीं सुनी। इसके बाद 9 फरवरी को उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी रिपोर्ट दर्ज करने की जगह पहले जांच कराने की बात कही। जांच के नाम पर पुलिस ने तीन दिन तक टरकाया।

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पुलिस ने नहीं की कोई पहल

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मामला मीडिया में आने के बाद नोएडा पुलिस ने 12 फरवरी 2017 को उनकी एफआईआर दर्ज की। इसके बाद भी पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए कोई पहल नहीं की। आरोपी 17 फरवरी को खुद एसएसपी से मिलने पहुंचे तो उन्हें बेहद नाटकीय तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया

इतना ही नहीं अमित ने नोएडा पुलिस को संदिग्ध आरोपियों की सूची समेत कई अन्य जानकारियां दी। इन पर पुलिस ने कोई काम नहीं किया, उल्टा आरोपियों की सूची और उनके द्वारा दिए गए साक्ष्य पुलिस ने लीक कर दिए।

वह शुरू से कह रहे कि कंपनी ने 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की है, इसके बावजूद पुलिस आरोपियों की बात को सही मानकर इसे 256 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा बता रही है। अमित जैन के अनुसार सीबीआई जांच के दौरान अगर नोएडा पुलिस की कोई मिलीभगत या कमी मिली तो वह उसके खिलाफ भी कोर्ट से कार्रवाई की मांग करेंगे।

शिकायतकर्ता केअनुसार ये रहीं खामियां

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1. वेबवर्क कंपनी का वेब पोर्टल एड्सबुक डॉट कॉम अब भी चल रहा है।
2. पुलिस ने कंपनी की तीसरी महिला निदेशक के खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई नहीं की।
3. पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के वक्त उनकी मर्सिडीज कार बरामद की थी। इनकी बीएमडब्ल्यू कार अब तक बरामद नहीं हुई है।
4. पुलिस अब तक ये भी पता नहीं लगा सकी है कि गिरफ्तार कंपनी निदेशक अनुराग गर्ग और संदेश वर्मा 12 फरवरी से 17 फरवरी के बीच कहां फरार थे।
5. आरोपियों ने निवेशकों से रकम लेने और लौटाने के लिए बिट क्वाइन का भी इस्तेमाल किया, जो भारत में गैर कानूनी है। इस पर भी पुलिस ने कुछ नहीं किया।
6. एफआईआर दर्ज करने में पुलिस ने बहुत वक्त लगाया। इसके बाद गिरफ्तारी का भी कोई प्रयास नहीं किया।
7. पुलिस ने 21 से 25 फरवरी तक आरोपियों को रिमांड पर लिया। इस दौरान भी पुलिस आरोपियों की कार समेत कोई ठोस जानकारी एकत्र नहीं कर सकी।
8. पुलिस ने आरोपियों पर भरोसा कर धोखाधड़ी को 256 करोड़ रुपये का बताया, जबकि उन्होंने 500 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है।
9. शिकायतकर्ता द्वारा दी गई संदिग्धों की सूची व अन्य साक्ष्य पुलिस द्वारा लीक करने का आरोप।
10. पुलिस ने अनुराग गर्ग और संदेश वर्मा के अलावा और किसी को आरोपी नहीं बनाया। कंपनी से मोटा मुनाफा कमाने वालों और बड़े निवेशकों की भी जांच नहीं की गई।

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