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चुनावी हार के बाद कांग्रेस ने साधी चुप्पी, प्रदेश कार्यालय भी कार्यकर्ताओं के बिन सूने
Mon, 27 May 2019 08:33 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 27 May 2019 08:33 AM IST
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फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रदेश कांग्रेस ने मानों चुप्पी साध ली है। अन्य पार्टियां जहां हार और जीत को लेकर समीक्षा बैठक कर रही है तो वहीं कांग्रेस कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। कार्यकर्ताओं की जमघट तक नहीं लग रहा है।
शीला दीक्षित को प्रदेश का कमान देने के बाद पार्टी में उत्साह देखने को मिला था। लोकसभा चुनाव भी पार्टी के प्रत्याशियों ने पूरे ऊर्जा के साथ लड़ा, लेकिन चुनाव में सातों लोकसभा सीट पर मिली हार ने उत्साह को ठंडा कर दिया है।
डीडीयू मार्ग स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में भी कार्यकर्ता नहीं पहुंच रहे हैं। उधर प्रदेश नेतृत्व की तरफ से भी कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा रहा है। कार्यकर्ता भी चुप्पी साध घरों में बैठे हुए है।
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पार्टी सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव पार्टी ने नहीं बल्कि प्रत्याशियों ने अपने दमखम पर चुनाव लड़ा था। लिहाजा सभी आत्ममंथन में ही जुटे हैं। पार्टी के तरफ से हार-जीत की समीक्षा इसी वजह से नहीं की जा रही है।
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शीला दीक्षित को प्रदेश का कमान देने के बाद पार्टी में उत्साह देखने को मिला था। लोकसभा चुनाव भी पार्टी के प्रत्याशियों ने पूरे ऊर्जा के साथ लड़ा, लेकिन चुनाव में सातों लोकसभा सीट पर मिली हार ने उत्साह को ठंडा कर दिया है।
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डीडीयू मार्ग स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में भी कार्यकर्ता नहीं पहुंच रहे हैं। उधर प्रदेश नेतृत्व की तरफ से भी कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा रहा है। कार्यकर्ता भी चुप्पी साध घरों में बैठे हुए है।
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पार्टी सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव पार्टी ने नहीं बल्कि प्रत्याशियों ने अपने दमखम पर चुनाव लड़ा था। लिहाजा सभी आत्ममंथन में ही जुटे हैं। पार्टी के तरफ से हार-जीत की समीक्षा इसी वजह से नहीं की जा रही है।
प्रत्याशी अपने स्तर पर ही समीक्षा कर रहे हैं। यह हालात तब है जब राजनीतिक पार्टियां अभी से ही आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है।
हताश कार्यकर्ताओं में जहां आप उत्साह भरने का काम कर रही है तो भाजपा उत्साहित कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं होने देना चाह रही है। वहीं कांग्रेस पार्टी की बात करें तो पूरा कुनबा बिखरा नजर आ रहा है।
प्रदेश नेतृत्व अब केंद्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देश का बांट जोह रही है, जबकि दिल्ली के कार्यकर्ता अपने प्रदेश नेतृत्व के आगामी रणनीति के इंतजार में है।
हताश कार्यकर्ताओं में जहां आप उत्साह भरने का काम कर रही है तो भाजपा उत्साहित कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं होने देना चाह रही है। वहीं कांग्रेस पार्टी की बात करें तो पूरा कुनबा बिखरा नजर आ रहा है।
प्रदेश नेतृत्व अब केंद्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देश का बांट जोह रही है, जबकि दिल्ली के कार्यकर्ता अपने प्रदेश नेतृत्व के आगामी रणनीति के इंतजार में है।