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अल्पसंख्यक आयोग में चेयरपर्सन के लिए किसी विशेष समुदाय से व्यक्ति नियुक्त करने की बाध्यता नहीं : हाईकोर्ट
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अल्पसंख्यक आयोग के चेयरपर्सन पद पर अन्य समुदायों की नियुक्ति की मांग खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के चेयरपर्सन के रूप में मुस्लिम और सिख के अलावा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों की नियुक्ति की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने याचिकाकर्ता को इस मुद्दे पर सरकार के पास प्रतिवेदन देने का अवसर देते हुए कहा कि एनसीएम एक्ट में आयोग में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान है, लेकिन चेयरपर्सन के लिए किसी विशेष समुदाय से व्यक्ति नियुक्त करने की बाध्यता नहीं है।
पीठ ने कहा कि एक्ट की धारा तीन में केवल यह प्रावधान है कि आयोग में एक चेयरपर्सन, वाइस चेयरपर्सन और पांच सदस्य होंगे। एक्ट में यह नहीं कहा गया कि आयोग में सभी अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्य होने चाहिए। प्रावधान केवल यह है कि चेयरपर्सन सहित पांच सदस्य अल्पसंख्यक समुदायों में से होंगे।
इसमें यह नहीं कहा गया कि सदस्य या चेयरपर्सन किसी विशेष अल्पसंख्यक समुदाय से होना चाहिए। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता इस मुद्दे पर प्रतिवेदन देता है तो उसे विचार में लिया जाए। याचिका में दावा किया गया था कि अब तक नियुक्त 16 चेयरपर्सनों में से 14 मुस्लिम और दो सिख रहे हैं। ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन जैसे अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं हुआ है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के चेयरपर्सन के रूप में मुस्लिम और सिख के अलावा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों की नियुक्ति की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने याचिकाकर्ता को इस मुद्दे पर सरकार के पास प्रतिवेदन देने का अवसर देते हुए कहा कि एनसीएम एक्ट में आयोग में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान है, लेकिन चेयरपर्सन के लिए किसी विशेष समुदाय से व्यक्ति नियुक्त करने की बाध्यता नहीं है।
पीठ ने कहा कि एक्ट की धारा तीन में केवल यह प्रावधान है कि आयोग में एक चेयरपर्सन, वाइस चेयरपर्सन और पांच सदस्य होंगे। एक्ट में यह नहीं कहा गया कि आयोग में सभी अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्य होने चाहिए। प्रावधान केवल यह है कि चेयरपर्सन सहित पांच सदस्य अल्पसंख्यक समुदायों में से होंगे।
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इसमें यह नहीं कहा गया कि सदस्य या चेयरपर्सन किसी विशेष अल्पसंख्यक समुदाय से होना चाहिए। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता इस मुद्दे पर प्रतिवेदन देता है तो उसे विचार में लिया जाए। याचिका में दावा किया गया था कि अब तक नियुक्त 16 चेयरपर्सनों में से 14 मुस्लिम और दो सिख रहे हैं। ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन जैसे अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं हुआ है।
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