कोटा से लौटे छात्रों की दास्तानः टिफिन वालों ने काम बंद कर दिया था, एक-एक दिन गिनकर काटा
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कोटा में लॉकडाउन में फंसे दिल्ली के 480 विद्यार्थी रविवार सुबह करीब 5.50 बजे 40 बसों से कश्मीरी गेट बस अड्डे पहुंचे। बीते एक महीने से भी अधिक वक्त से कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे छात्र-छात्राओं के चेहरे पर घर लौटने की खुशियां झलक रही थीं।
कुछ छात्रों ने बताया कि वहां इतने दिन भारी परेशानी में बिताए। टिफिन वालों ने खाना देना बंद कर दिया था। एक-एक दिन गिनकर काट रहे थे। पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था।
इससे पहले बस अड्डे पर बने जिले वार काउंटर पर मेडिकल टीम ने सभी की कोविड-19 संक्रमण की जांच की। संक्रमण के खतरे को देखते हुए अभिभावकों को बस अड्डे आने से मना कर दिया गया था। जांच के बाद सभी विद्यार्थियों को डीटीसी की बसों से उनके घर पहुंचाया गया। इन विद्यार्थियों को 14 दिन तक होम क्वारंटीन रहना पड़ेगा।
कोटा में फंसे सभी छात्रा मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले की तैयारी के लिए एलेन, आकाश सहित अन्य संस्थानों में पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद उन्हें खाने, रहने सहित कई तरह की बुनियादी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इंतजार के बाद आखिरकार रविवार सुबह बसों में पहुंचे छात्र-छात्राओं की की थर्मल स्क्रीेनिंग भी की गई। ट्रांसपोर्टर हरीश सभरवाल ने बताया कि कोटा में फंसे बच्चों को दिल्ली लाने के लिए 40 एसी बसें भेजी गई थीं।
एक सीट पर एक विद्यार्थी, सभी को दिए गए मास्क-सैनिटाइजर
परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर वेदपाल ने बताया कि शनिवार रात को कोटा से सभी बसों का एक साथ रवाना किया गया। बस में 25 पुलिसकर्मियों के अलावा सिविल डिफेंस के भी 45 कर्मी थे।
एक सीट पर एक विद्यार्थी को बैठाया गया था और सभी तरह के एहतियात बरते जा रहे थे। मास्क, सैनिटाइजर और खाना भी छात्रों को को दिए गए ताकि सफर के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। कोटा में पहुंचने के बाद राजस्थान सरकार और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत के बाद बच्चों को बसों में लाया गया।
मां के हाथ के पराठे खाकर भूल गए सभी परेशानी
कोटा से लौटे एक विद्यार्थी ने बताया कि छह माह बाद मां के हाथ के पराठेे खाकर सब परेशानी भूल गए। उन्होंने कहा कि वहां टिफिन रोज आ रहा था, लेकिन अकेलेपन में घर की बहुत याद आ रही थी। मेडिकल में दाखिले की तैयारी के लिए एलेन में पढ़ाई कर रहे छात्रों के घर लौटने पर परिवार में खुशी का माहौल था तो बच्चों को देखकर, परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू भी छलक पड़े। संगम विहार में रहने वाले आकाश की मां मनोरमा देवी ने पहले ही खाना तैयार कर लिया था। उन्होंने कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए घर में सभी एहतियात बरतेंगे, क्योंकि कोरोना को हराना है। मेडिकल की तैयारी के लिए पिछले साल ही कोटा स्थित संस्थान एलेन में पढ़ाई कर रहे रवि को टिफिन वाले ने खाना देना बंद कर दिया, लेकिन कुछ दोस्तों के साथ मिलकर किसी हॉस्टल में इकट्ठे खाना खाते रहे। बकौल रवि, घर लौटने के बाद मम्मी, पापा और बहन के चेहरे पर खुशियां देखकर मैं हर परेशानी भूल गया।
टिक टॉक बनाने से किया था मना
कोटा से दिल्ली तक के सफर के दौरान बस में स्टूडेंट्स को मास्क लगाना जरूरी था। इस दौरान उन्हें फोन से फोटो, वीडियो या टिक टॉक विडियो तैयार करने से भी मना कर दिया गया था। परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर (इंफोर्समेंट) वेदपाल ने बताया कि भावी, इंजीनियरों और डॉक्टरो को मुश्किल वक्त में उनके अपनों तक पहुंचाने की जिम्मेवारी निभाने का मुझे सौभाग्य मिला, मैं बहुत खुश हूं। हालांकि मुझे शुगर है, फिर भी छात्र-छात्राओं को लेकर जब बस में लौट रहा था तो मुझे लगा कि मैं लॉकडाउन के इस दौर में परेशानियों का सामना कर रहे बच्चों को नके माता-पिता तक पहुंचा रहा हूं।