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विलुप्त हो रहे काले व नीले हिरण के लिए आरामगाह बनेगा अरावली क्षेत्र

Thu, 26 May 2016 01:01 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Thu, 26 May 2016 01:01 AM IST
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The resort will be black and blue deer in Aravalli region

विलुप्त होते वन्य जीवों में शुमार काले और नीले हिरण के संरक्षण के लिए वन विभाग ने खाका तैयार किया है। इसके लिए अरावली के सरबसीरपुर स्थित रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र का चयन किया गया है। यहां अमेरिकी देशों में वन्य जीवों को संरक्षित के लिए चलाए जाने वाले सिल्वी-पेस्टोरल मॉडल पर इसे विकसित करने की योजना तैयार की गई है।

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जिला मुख्यालय द्वारा पूरा प्रस्ताव बनाकर प्रदेश सरकार को भेजा गया है। वर्ष 1957 से सुल्तानपुर राष्ट्रीय पक्षी उद्यान से थोड़े दूर गुडग़ांव खंड में स्थित 140 हेक्टेयर (346 एकड़) क्षेत्र में सरबसीरपुर वन संरक्षित क्षेत्र घोषित है।
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जिसमें वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस क्षेत्र में लवण कुंड होने के कारण यहां पर झाड़ी जंगल और फिर ओपन फॉरेस्ट (पेड़, झाड़ी और घास) के रूप में तब्दील हो गई। यहां पर पहले काले और नीले हिरण के लिए माकूल क्षेत्र था, लेकिन वक्त के साथ विकसित होते अधिक घने जंगल की वजह से यह काले और नीले हिरण के लिए उपयुक्त नहीं बचा।
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अब अरावली के जंगलों में विलुप्त होते इन वन्य जीवों को संरक्षित करने के लिए विभाग ने नई पहल की है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिल्वी पेस्टोरल मॉडल पर वन संरक्षित क्षेत्र को इन वन्य जीव के लिए तैयार करने का प्रस्ताव तैयार किया है। पूरे प्रोजेक्ट को चार चरणों में वर्ष 2020 तक पूरा किया जाएगा।

मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद इसी वर्ष इसे शुरू करने की योजना है। पहले दो वर्ष में इस क्षेत्र के 40 हेक्टेयर को और अगले दो वर्षों में 30 हेक्टेयर को विकसति किया जाएगा। यहां पर इन वन्य जीवों के लिए उपयुक्त पेड़ और घास लगाए जाएंगे। मुख्य वन संरक्षक अधिकारी सत्यभान ने बताया कि वन और वन्य जीव को संरक्षित करने के लिए मुख्यालय को भेजा गया है। इसकी अनुमति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

The resort will be black and blue deer in Aravalli region

संरक्षित जीवों में है शुमार : भारत सरकार ने इसे संरक्षित करने की योजना बनाई और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इसका बचाव किया जाता है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में इसके संरक्षण का जिक्र है। वन्य जीव के अधिकारियों के मुताबिक काले व नीले हिरण की खूबियां इसकी दुश्मन भी बनती रही हैं।

खाल और मांस के लिए इसका खूब शिकार किया गया। उत्तर-पूर्व को छोड़कर देशभर में पाए जाने वाले इस जानवर का इतना शिकार हुआ कि इसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा। हवा की गति से छलांग लगाकर चौकड़ी भरते और तेज रफ्तार में चारों पैर समेटकर हवा में उडना इसकी खूबी है।

खास बातें
-आज भारत में इसकी संख्या लगभग 50 हजार है
-यह पाकिस्तान और नेपाल के नेशनल पार्क में भी काला हिरण पाया जाता है।
-यह हमेशा 15-20 के झुंड में रहता है
-यह घास के मैदान में पाया जाता है और इसका आहार घास, फली, फूल और फल हैं
-इसकी उम्र 16 वर्ष होती है
-अपने देश में तो काला हिरण धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है। धर्म ग्रंथों में इसे चंद्रमा की सवारी भी कहा गया है।

यहां अभी की जा रही है संरक्षित
-बांधवगढ़ नेशनल पार्क, भरतपुर पक्षी अभयारणय, कॉरबेट नेशनल पार्क, गिर फॉरेस्ट नेशनल पार्क, कान्हा नेशनल पार्क, रणथंभोर नेशनल पार्क समेत तमाम प्रमुख नेशनल पार्क और चिडिय़ाघरों में काले हिरण के संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

क्या है सिल्वी-पेस्टोरल मॉडल
सिल्वी पेस्टोरल वन व वन्य जीवों के लिए एक खास तकनीक है। इसमें पेड़ों को एक निश्चित दूरी पर लगाई जाती है। पेड़ों की दूरी के बीच घास और फली को लगाया जाता है। जिससे मानसून और ठंड के दिनों में जानवरों को घास मिल सके और गर्मियों में पेड़ों से गिरने वाले पत्ते व फली खाकर गुजारा करते हैं। इसी क्षेत्र में पानी का भी इंतजाम किया जाता है।

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