सीएसई ने स्वच्छता अभियान पर उठाए सवाल, कहा सरकार के पास नहीं जमीनी आंकड़े
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) ने देश के स्वच्छता अभियान की सफलता पर सवाल उठाए हैं। सीएसई ने रिपोर्ट में कहा है कि भारत सरकार इसकी सफलता के लिए काफी प्रयास कर रही है, लेकिन आदतों में बदलाव जैसे जमीनी आंकड़ों के अभाव में इसकी सफलता पर संदेह है।
यह सबसे जरूरी चीज है कि लोगों की आदत में बदलाव आए। वे शौचालय का इस्तेमाल करें। सीएसई ने कहा कि लोगों को शौचालय के इस्तेमाल पर होने वाले स्वास्थ्य फायदे को बताने और प्रोत्साहित करने के लिए भी कोई तंत्र विकसित नहीं है।
सीएसई ने बृहस्पतिवार को स्वच्छता अभियान को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें कहा गया कि भारत में पानी से पैदा होने वाले रोग की भी निगरानी के लिए कोई तंत्र विकसित नहीं किया गया है।
2 अक्तूबर को पूरे हुए स्वच्छ भारत मिशन को दो साल
सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि शहरों और गांवों में मुद्दों को अलग-अलग तरीके से लिया जाना चाहिए। शहरी शौचालय सीवेज शोधन यंत्रों से जुड़े होते हैं, जबकि ग्रामीण भागों में कई तरह की समस्याएं हैं।
मसलन गरीबी व आदत में बदलाव, पानी की उपलब्धता और अपशिष्ट की निकासी व शोधन जैसे बहुत से मामले जुड़े होते हैं। 2 अक्तूबर को स्वच्छ भारत मिशन को दो साल पूरे हो चुके हैं।
2019 तक भारत को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। हाल ही में सीएसई की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि 2019 तक शौचालय के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 23 लाख शौचालय प्रति माह और 56 शौचालय प्रत्येक मिनट पर बनने चाहिए।