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Delhi NCR News: दर्द से राहत की जरूरत बड़ी, पर पैलिएटिव केयर की पहुंच अब भी सीमित
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-देश में हर साल करीब 70 लाख से 1 करोड़ लोगों को पैलिएटिव केयर की जरूरत, चार फीसदी से भी कम को मिल रही सुविधा
सिमरन
नई दिल्ली। गंभीर बीमारियों और कैंसर से जूझ रहे मरीजों को दर्द और अन्य तकलीफदेह लक्षणों से राहत देने वाली पैलिएटिव केयर की जरूरत लगातार बढ़ रही है। एम्स नई दिल्ली के पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की ओर से प्रदर्शित आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में हर साल करीब 5.68 करोड़ लोगों को इस देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन इनमें से केवल 14 फीसदी लोगों तक ही यह सुविधा पहुंच पाती है। भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां जरूरतमंद मरीजों में चार फीसदी से भी कम को पैलिएटिव केयर मिल पा रही है।
एम्स के 71वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘एम्स: हेल्थकेयर इनोवेशन के सात दशक’ प्रदर्शनी में ऑन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग ने इससे जुड़े आंकड़े और सुविधाओं की जानकारी प्रस्तुत की। विभाग के अनुसार, भारत में हर साल करीब 70 लाख से एक करोड़ लोगों को पैलिएटिव केयर की जरूरत होती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 526 पैलिएटिव केयर सेंटर थे। वहीं, टर्मिनल स्टेज के कैंसर मरीजों में 98.3 फीसदी की पैलिएटिव केयर की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
एम्स में कई स्तरों पर उपलब्ध है देखभाल
एम्स नई दिल्ली में मरीजों के लिए ओपीडी, भर्ती मरीजों की कंसल्टेशन, समर्पित पैलिएटिव केयर बेड, टेली-पैलिएटिव केयर और चुनिंदा मरीजों के लिए घर पर देखभाल की सुविधा उपलब्ध है। मरीज के निधन के बाद उनके परिवार को शोक सहायता भी दी जाती है। विभाग के अनुसार, बीआरएआईआरसीएच में छह और एनसीआई झज्जर में 40 समर्पित पैलिएटिव केयर बेड हैं।
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पांच साल में बढ़े मरीज
एम्स के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच पैलिएटिव केयर ओपीडी में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई। एम्स नई दिल्ली में ओपीडी के मरीजों की संख्या 9,054 से बढ़कर 17,529 हो गई, जबकि एनसीआई झज्जर में यह आंकड़ा 7,434 से बढ़कर 12,878 पहुंच गया। इसी अवधि में भर्ती मरीजों की संख्या एम्स नई दिल्ली में 788 से बढ़कर 1,520 और एनसीआई झज्जर में 694 से बढ़कर 1,644 हो गई।
प्रशिक्षण और जागरूकता पर जोर
विभाग की ओर से एमडी कार्यक्रम, कार्यशालाओं, नर्सिंग और स्नातक स्तर के प्रशिक्षण के साथ चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि पैलिएटिव केयर को केवल कैंसर मरीजों तक सीमित रखने के बजाय अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों तक भी पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए अस्पतालों और विभिन्न चिकित्सा विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
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सिमरन
नई दिल्ली। गंभीर बीमारियों और कैंसर से जूझ रहे मरीजों को दर्द और अन्य तकलीफदेह लक्षणों से राहत देने वाली पैलिएटिव केयर की जरूरत लगातार बढ़ रही है। एम्स नई दिल्ली के पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की ओर से प्रदर्शित आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में हर साल करीब 5.68 करोड़ लोगों को इस देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन इनमें से केवल 14 फीसदी लोगों तक ही यह सुविधा पहुंच पाती है। भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां जरूरतमंद मरीजों में चार फीसदी से भी कम को पैलिएटिव केयर मिल पा रही है।
एम्स के 71वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘एम्स: हेल्थकेयर इनोवेशन के सात दशक’ प्रदर्शनी में ऑन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग ने इससे जुड़े आंकड़े और सुविधाओं की जानकारी प्रस्तुत की। विभाग के अनुसार, भारत में हर साल करीब 70 लाख से एक करोड़ लोगों को पैलिएटिव केयर की जरूरत होती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 526 पैलिएटिव केयर सेंटर थे। वहीं, टर्मिनल स्टेज के कैंसर मरीजों में 98.3 फीसदी की पैलिएटिव केयर की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
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एम्स में कई स्तरों पर उपलब्ध है देखभाल
एम्स नई दिल्ली में मरीजों के लिए ओपीडी, भर्ती मरीजों की कंसल्टेशन, समर्पित पैलिएटिव केयर बेड, टेली-पैलिएटिव केयर और चुनिंदा मरीजों के लिए घर पर देखभाल की सुविधा उपलब्ध है। मरीज के निधन के बाद उनके परिवार को शोक सहायता भी दी जाती है। विभाग के अनुसार, बीआरएआईआरसीएच में छह और एनसीआई झज्जर में 40 समर्पित पैलिएटिव केयर बेड हैं।
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पांच साल में बढ़े मरीज
एम्स के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच पैलिएटिव केयर ओपीडी में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई। एम्स नई दिल्ली में ओपीडी के मरीजों की संख्या 9,054 से बढ़कर 17,529 हो गई, जबकि एनसीआई झज्जर में यह आंकड़ा 7,434 से बढ़कर 12,878 पहुंच गया। इसी अवधि में भर्ती मरीजों की संख्या एम्स नई दिल्ली में 788 से बढ़कर 1,520 और एनसीआई झज्जर में 694 से बढ़कर 1,644 हो गई।
प्रशिक्षण और जागरूकता पर जोर
विभाग की ओर से एमडी कार्यक्रम, कार्यशालाओं, नर्सिंग और स्नातक स्तर के प्रशिक्षण के साथ चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि पैलिएटिव केयर को केवल कैंसर मरीजों तक सीमित रखने के बजाय अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों तक भी पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए अस्पतालों और विभिन्न चिकित्सा विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।