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डीटीसी की बदहाली और बेबसी : बे-बस विभाग, करोड़ों की देनदारी और घाटे से निपटना सरकार के लिए बड़ी चुनौती

Mon, 21 Apr 2025 02:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 21 Apr 2025 02:07 AM IST
सार

सरकार ने इस साल के अंत तक दिल्ली की सड़कों पर 5,000 इलेक्ट्रिक बसें उतारने की बात कही है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि डीटीसी की परिचालन लागत को भी कम करेगा।

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The misery and helplessness of DTC
file pic - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बदहाल स्थिति और बढ़ती वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए दिल्ली की भाजपा सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 60 हजार करोड़ रुपये की देनदारी और 14 हजार करोड़ रुपये के घाटे के बावजूद सरकार डीटीसी की स्थिति सुधारने के लिए बसों की संख्या बढ़ाने, नए मार्गों का अध्ययन करने और गैर-परिचालन राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। मौजूदा समय में बीते साल से दिल्ली की सड़कों पर नई बसों की आमद नहीं हो सकी है। वहीं पुरानी बसें सड़कों से हटी जरूर हैं। इससे लोगों को बस स्टॉप पर समय पर बसें नहीं मिल रही हैं।
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सरकार ने इस साल के अंत तक दिल्ली की सड़कों पर 5,000 इलेक्ट्रिक बसें उतारने की बात कही है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि डीटीसी की परिचालन लागत को भी कम करेगा, क्योंकि इलेक्ट्रिक बसों का रखरखाव और ईंधन लागत सीएनजी बसों की तुलना में कम है।
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बीते साल 320 नई इलेक्ट्रिक बसों शामिल गया गया था। इससे दिल्ली में वर्तमान में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 1,970 तक पहुंच गई है। परिवहन विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस सप्ताह सरकार छोटी इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाने जा रही है। ये 9 मीटर लंबी बसें बाहरी दिल्ली के इलाकों को मुख्य शहर से जोड़ने और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए शुरू की जा रही हैं।
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पहले आम आदमी पार्टी की सरकार ने संकरे इलाके में मोहल्ला बसों को चलाने की योजना बनाई थी। इसके लिए 2,080 इलेक्ट्रिक बसों का ऑर्डर दिया गया, लेकिन यह बसें अभी तक सड़कों पर नहीं आई है। भाजपा की दिल्ली सरकार अब इन बसों का नाम बदलकर चलाने जा रही है।

--बस मार्गों का किया जाएगा अध्ययन...
डीटीसी की परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए सरकार नए बस मार्गों का अध्ययन करा रही है। बताया जा रहा है 468 मार्गों में से केवल 57% पर ही बसें चल रही हैं, जिसके कारण यात्रियों को असुविधा हो रही है।


--राजस्व बढ़ाने पर सरकार का जोर...
वित्तीय घाटे से निपटने के लिए सरकार गैर-परिचालन राजस्व बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है। डीटीसी के बस स्टैंड, टर्मिनल, और डिपो के मुख्य द्वारों पर विज्ञापन लगाने की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा, डीटीसी के अप्रयुक्त डिपो स्थानों को निजी कंपनियों को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए पट्टे पर देने की योजना है। कैग की हालिया रिपोर्ट में डीटीसी की देनदारी 2015-16 में 28,263 करोड़ रुपये से बढ़कर 2021-22 में 65,274 करोड़ रुपये होने का खुलासा हुआ है। इसके अलावा, 2015-22 के दौरान 14,198.86 करोड़ रुपये का परिचालन घाटा दर्ज किया गया।
 
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