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जिन सिक्कों ने चलाया बाजार, अब उन्हीं को लेकर संशय
बयूरो/ अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 02 Oct 2017 09:43 AM IST
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नोटबंदी के दौरान जिन सिक्कों ने बाजार को चलाया। अब इन सिक्कों को लेकर बाजार असमंजस की स्थिति में आ गया है। पिछले छह माह से शहर के बाजार में दस रुपये के सिक्कों का लेनदेन प्रभावित है। बैंकों के पल्ला झाड़े जाने से अब इन सिक्कों से व्यापारी वर्ग किनारा करने लगा है। मंदिरों में भारी मात्रा में सिक्के एकत्रित हो गए हैं।
बैंक प्रबंधन दस रुपये के सिक्के मार्केट सर्कुलेशन के लिए होने का हवाला देकर व्यापारियों को बैंक से वापस लौटा रहा है। ऐसे में इन सिक्कों का क्या किया जाए। इसको लेकर हर कोई चिंतित है। बाजार सशंय की स्थिति में है।
दरअसल, नवरात्र के दौरान शहर के मंदिरों में एक रुपये से लेकर दस रुपये की रेजगारी भारी मात्रा प्राप्त हुई है। शहर के एक मंदिर के पास तीस हजार रुपये के सिक्के पड़े हैं, लेकिन बैंक प्रबंधन लेने को तैयार नहीं है। अब इन सिक्कों को निकालने के लिए व्यापारी वर्ग से संपर्क किया जा रहा है लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी है। शहर के एक अन्य मंदिर के पास करीब 40 हजार रुपये के सिक्के एकत्रित हो गए हैं। माना जा रहा है कि इसकी गिनती करना आसान नहीं होने के चलते बैंक से वापस लौटाया जा रहा है।
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बैंक प्रबंधन दस रुपये के सिक्के मार्केट सर्कुलेशन के लिए होने का हवाला देकर व्यापारियों को बैंक से वापस लौटा रहा है। ऐसे में इन सिक्कों का क्या किया जाए। इसको लेकर हर कोई चिंतित है। बाजार सशंय की स्थिति में है।
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दरअसल, नवरात्र के दौरान शहर के मंदिरों में एक रुपये से लेकर दस रुपये की रेजगारी भारी मात्रा प्राप्त हुई है। शहर के एक मंदिर के पास तीस हजार रुपये के सिक्के पड़े हैं, लेकिन बैंक प्रबंधन लेने को तैयार नहीं है। अब इन सिक्कों को निकालने के लिए व्यापारी वर्ग से संपर्क किया जा रहा है लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी है। शहर के एक अन्य मंदिर के पास करीब 40 हजार रुपये के सिक्के एकत्रित हो गए हैं। माना जा रहा है कि इसकी गिनती करना आसान नहीं होने के चलते बैंक से वापस लौटाया जा रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के बाद बढ़ी सिक्कों की संख्या
नोटबंदी से पहले दस रुपये के सिक्कों को लेकर बाजार सामान्य था। नोटबंदी के बाद दस रुपये के सिक्को की संख्या बढ़ गई। उस दौरान एक सौ रुपये के नोट कम मात्रा में आ रहे थे। व्यापारियों ने अपना व्यापार चलाने के लिए दस रुपये के सिक्कों को भारी मात्रा में लेना शुरू कर दिया। लेकिन अब वापस ग्राहक को देने में नकली एवं असली का चक्कर सामने आ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि नोटबंदी से पहले यह स्थिति नहीं थी। सिक्कों की संख्या बाजार में अधिक होने के कारण हो गई है। बैंक प्रबंधन इस विषय पर बातचीत करने के लिए सामने नहीं आ रहा है।
नोटबंदी से पहले दस रुपये के सिक्कों को लेकर बाजार सामान्य था। नोटबंदी के बाद दस रुपये के सिक्को की संख्या बढ़ गई। उस दौरान एक सौ रुपये के नोट कम मात्रा में आ रहे थे। व्यापारियों ने अपना व्यापार चलाने के लिए दस रुपये के सिक्कों को भारी मात्रा में लेना शुरू कर दिया। लेकिन अब वापस ग्राहक को देने में नकली एवं असली का चक्कर सामने आ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि नोटबंदी से पहले यह स्थिति नहीं थी। सिक्कों की संख्या बाजार में अधिक होने के कारण हो गई है। बैंक प्रबंधन इस विषय पर बातचीत करने के लिए सामने नहीं आ रहा है।
आरबीआई
- फोटो : self
नकली एवं असली के भ्रम में व्यापारी
बाजार में दस रुपये के दो प्रकार के सिक्के हैं। इनमें असली एवं नकली सिक्कों को लेकर भ्रम की स्थिति है। छोटे व्यापारी के साथ बड़े व्यापारी भी दस रुपये की सिक्कों की पहचान सही से नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में व्यापारियों ने नुकसान से बचने के लिए सिक्कों को लेना ही बंद कर दिया है। दूसरी तरफ बैंक प्रबंधन भी व्यापारियों से पीछ़ा छुड़ा रहे हैं। अब ग्राहक वर्ग भी दस रुपये का सिक्का लेने से साफ इन्कार करता नजर आ रहा है।
बैंक प्रबंधन मनमानी कर रहा है। दस रुपये का सिक्का भारतीय मुद्रा है, उसके बावजूद वापस लौटाया जा रहा है। अब इन सिक्कों के लेकर छोटे छोटे व्यापारियों से बातचीत हो रही है। करीब 25 हजार रुपये के सिक्के वर्तमान में मौजूद है।
-राकेश कुमार, प्रधान, काली मंदिर एनआईटी
हर माह भंडार खोला जा रहा है। सिक्के आने पर बैंक में जाने के बजाय यहां आने वाले भक्तों को देकर बदल रहे हैं। हर माह करीब एक हजार सिक्के आ रहे हैं।
-आचार्य संतोष, बांके बिहारी मंदिर
असली एवं नकली के चक्कर में दस रुपये का सिक्का ग्राहक लेने को तैयार नहीं है। इसलिए सिक्का लेना बंद कर दिया है। हमारे पास ही सिक्के पड़े है, अब इसका क्या करें।
-संजय कुमार, व्यापारी
दस रुपये का सिक्का भारतीय मुद्रा है। हर बैंक को इसे लेना है। यदि कोई बैंक नहीं लेता है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। जिन के पास भी सिक्के है, वह अपनी शिकायत दे सकते हैं। संबंधित बैंक से बातचीत की जाएगी।
-इंद्र मोहन शर्मा, अग्रणी बैंक प्रबंधक, फरीदाबाद
बाजार में दस रुपये के दो प्रकार के सिक्के हैं। इनमें असली एवं नकली सिक्कों को लेकर भ्रम की स्थिति है। छोटे व्यापारी के साथ बड़े व्यापारी भी दस रुपये की सिक्कों की पहचान सही से नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में व्यापारियों ने नुकसान से बचने के लिए सिक्कों को लेना ही बंद कर दिया है। दूसरी तरफ बैंक प्रबंधन भी व्यापारियों से पीछ़ा छुड़ा रहे हैं। अब ग्राहक वर्ग भी दस रुपये का सिक्का लेने से साफ इन्कार करता नजर आ रहा है।
बैंक प्रबंधन मनमानी कर रहा है। दस रुपये का सिक्का भारतीय मुद्रा है, उसके बावजूद वापस लौटाया जा रहा है। अब इन सिक्कों के लेकर छोटे छोटे व्यापारियों से बातचीत हो रही है। करीब 25 हजार रुपये के सिक्के वर्तमान में मौजूद है।
-राकेश कुमार, प्रधान, काली मंदिर एनआईटी
हर माह भंडार खोला जा रहा है। सिक्के आने पर बैंक में जाने के बजाय यहां आने वाले भक्तों को देकर बदल रहे हैं। हर माह करीब एक हजार सिक्के आ रहे हैं।
-आचार्य संतोष, बांके बिहारी मंदिर
असली एवं नकली के चक्कर में दस रुपये का सिक्का ग्राहक लेने को तैयार नहीं है। इसलिए सिक्का लेना बंद कर दिया है। हमारे पास ही सिक्के पड़े है, अब इसका क्या करें।
-संजय कुमार, व्यापारी
दस रुपये का सिक्का भारतीय मुद्रा है। हर बैंक को इसे लेना है। यदि कोई बैंक नहीं लेता है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। जिन के पास भी सिक्के है, वह अपनी शिकायत दे सकते हैं। संबंधित बैंक से बातचीत की जाएगी।
-इंद्र मोहन शर्मा, अग्रणी बैंक प्रबंधक, फरीदाबाद