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हाशिमपुरा हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को जारी किया नोटिस

Thu, 19 May 2016 07:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 19 May 2016 07:56 PM IST
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The High Court has issued notice to the state government in Hashimpura murder case
सीएम अख‌िलेश - फोटो : Amar Ujala

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लीगल सर्विस अथॉरिटी को नोटिस जारी कर हाशिमपुरा दंगा मामले में मारे गए 42 लोगों को मुआवजे संबंधी मुद्दे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने यूपी सरकार को भी यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवारों को कितना मुआवजा दिया गया है।

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वर्ष 1987 में हुए दंगों के दौरान प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी) के जवानों पर 42 लोगों की हत्या का आरोप था।न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ इस मामले में आरोपी बनाए गए पीएसी के 16 जवानों को ट्रायल कोर्ट द्वारा पिछले वर्ष 21 मार्च को बरी करने के खिलाफ दायर अपील पर भी सुनवाई कर रही है। 
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ट्रायल कोर्ट के फैसले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), उत्तर प्रदेश सरकार के साथ ही पीड़ितों के बच्चों ने भी चुनौती दी है। वहीं पीड़ित परिवारों ने उचित मुआवजा दिलवाने के लिए भी याचिका दायर की है। इस मामले में एनएचआरसी ने जवानों को बरी करने संबंधी 21 मार्च 15 के  ट्रायल कोर्ट के फैसले को खारिज कर पूरे मामले की न्यायिक जांच करवाने का आग्रह किया है। 

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जानिए क्या था मामला 

The High Court has issued notice to the state government in Hashimpura murder case
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
वहीं, उप्र सरकार के अनुसार निचली अदालत का फैसला कानूनी खामियों से पूर्ण है और अदालत ने मामले में कई अहम साक्ष्यों को नजरअंदाज किया है। उप्र सरकार द्वारा दायर अपील में कहा गया है कि यह पूरा मामला हिरासत में हिंसा का है लेकिन निचली अदालत ने अपना फैसला देते हुए इस महत्वपूर्ण तथ्य को दरकिनार दिया। 

हत्याकांड में जो लोग बच गए थे उनके बयानों में किसी प्रकार का विरोधाभास नहीं है। मामले में तत्कालीन डीएम व एसपी के बयानों से स्पष्ट है कि घटनास्थल पर जिस पीएसी की कंपनी की ड्यूटी थी आरोपी उसी में शामिल थे। इसके अलावा कंपनी स्थल पर उस ट्रक से खून को धोया गया था, जिसमें लोगों को गंगनहर के किनारे ले जाया गया। ऐसे में निचली अदालत के फैसले को रद्द कर सभी 16 आरोपियों को सजा दी जाए। 

मेरठ जिला स्थित हाशिमपुरा में 22 मई 1987 को बड़ी संख्या में पीएसी के जवान पहुंचे थे। इन जवानों ने वहां से मस्जिद के सामने चल रही धार्मिक सभा में से मुस्लिम समुदाय के करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया। आरोप था कि 42 लोगों की गोली मारकर हत्या करने के बाद उनके शव नहर में फेंक दिए थे।
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