यौन शोषण के लंबित मामलों पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, तथ्यों को बताया चौंकाने वाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने राजधानी में बच्चों से यौन शोषण के चार हजार से भी अधिक मामलों के लंबित होने पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि जिस हिसाब से इन मामलों का निपटारा हो रहा है उसे देखते हुए अदालतों के गठन पर विचार किया जाना जरूरी है।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा कि यह एक गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दा है। इन मामलों का निपटारा समयबद्ध ढंग से किए जाने पर विचार जरूरी है।
अदालत ने दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) द्वारा पेश रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद उक्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पेश डाटा में जो तथ्य दिए गए हैं वे काफी चौंकाने वाले हैं। बच्चों से यौन शोषण के मामलों का समयबद्ध ढंग से निपटारा जरूरी है।
बच्चों से यौन शोषण के 4000 मामले लंबित
अदालत यौन शोषण मामलों को लेकर एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता एचएस फुलका ने अदालत का ध्यान डीएलएसए द्वारा पेश रिपोर्ट की और दिलवाया।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार 31 जुलाई तक राजधानी की 11 पोक्सो अदालतों में बच्चों से यौन शोषण से संबंधित 4274 मामले लंबित थे। जनवरी से 31 जुलाई तक मात्र 449 मामलों का ही निपटारा किया जा सका है।
फुलका ने कहा कि इस हिसाब से इन मामलों के निपटारे को दस वर्ष लग जाएंगे और इस दौरान हजारों नए मामले आ जाएंगे। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इन सभी 11 अदालतों को पोक्सो मामलों की विशेष अदालत बना दी जाए और अन्य मामले न भेजें जाएं ताकि लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सके। अदालत ने इस मुद्दे पर सुनवाई 5 अक्तूबर तय की है।