फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The High Court cannot intervene if the security of the country is threatened by social media

हाईकोर्ट ने कहा, सोशल मीडिया से देश की सुरक्षा को खतरा है तो नहीं कर सकते हस्तक्षेप

Thu, 06 Aug 2020 05:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 06 Aug 2020 05:50 AM IST
विज्ञापन
The High Court cannot intervene if the security of the country is threatened by social media
delhi high court

दिल्ली हाईकोर्ट ने सेना में 89 सोशल मीडिया एप्लिकेशन पर प्रतिबंध के खिलाफ जम्मू और कश्मीर के लेफ्टिनेंट कर्नल की याचिका खारिज कर दी। इससे पहले हाईकोर्ट ने कर्नल को चेतावनी भी दी थी कि अगर उन्हें फेसबुक ज्यादा पसंद है तो वह सेना से इस्तीफा दे सकते हैं।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति आशा मेनन की पीठ ने कहा कि अगर सरकार ने यह निर्णय लिया है कि सैन्य कर्मियों द्वारा फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों के इस्तेमाल से दुश्मन देशों को फायदा पहुंचता है तो अदालत इस फैसले में हस्तक्षेप देने की अनिच्छुक है। पीठ ने कहा कि वर्तमान दौर में युद्ध कौशल केवल ‘भूभाग कब्जा करने’ तक सीमित नहीं है। 
विज्ञापन


पीठ ने आदेश सुनाते हुए लेफ्टीनेंट कर्नल पी के चैधरी से कहा, ‘‘क्षमा करिए, हम याचिका खारिज कर रहे हैं, धन्यवाद।’’ पीठ ने कहा कि संपर्क के अन्य माध्यम अब भी याचिकाकर्ता अधिकारी के पास मौजूद हैं और यह प्रतिबंध सिर्फ कुछ सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों के संबंध में ही है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कर्नल ने खुफिया महानिदेशक की ओर से 6 जून की नई नीति वापस लेने के संबंध में अदालत से अनुरोध किया था। इस नई नीति के अनुसार सेना के सभी कर्मियों को फेसबुक और इंस्टाग्राम एवं 87 अन्य सोशल मीडिया मंचों से अपने अकाउंट डिलीट करने को कहा गया था। 

पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में अगर सरकार ने पूरे आकलन के बाद यह निर्णय लिया है कि उसके सुरक्षा बलों के कर्मियों द्वारा कुछ निश्चित सोशल मीडिया मंचों के इस्तेमाल से दुश्मन देश को फायदा पहुंचता है तो अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। 

वहीं केंद्र का पक्ष रखने वाले स्थायी वकील अजय दिग्पाल ने कहा कि यह नीतिगत निर्णय लिया गया क्योंकि यह पाया गया कि फेसबुक बग है और यह साइबर हथियार के रूप में घुसपैठ कर रहा था। ऐसे कई मौके आए जब कर्मियों को निशाना बनाया गया।


कर्नल ने अपनी याचिका में कहा था कि वह फेसबुक के सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और इसका इस्तेमाल वे अपने दोस्तों, परिवार और अपनी बड़ी बेटी से संपर्क करने के लिए करते हैं क्योंकि ये सभी विदेश में रहते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed