सरकार ने दी कोटा खत्म करने के फैसले को चुनौती
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नर्सरी दाखिले में निजी स्कूलों में प्रबंधन कोटा खत्म करने के मामले को लेकर अब दिल्ली सरकार हाईकोर्ट पहुंच गई है। सरकार ने सिंगल जज के उस फैसले को दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है, जिसमें प्रबंधन कोटा खत्म करने के निर्णय पर रोक लगाई गई है।
सरकार ने तर्क रखा है कि प्रबंधन कोटा छात्रों के हित के खिलाफ है। सरकार द्वारा दायर अपील पर मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को सुनवाई होगी।
शिक्षा निदेशालय ने खंडपीठ के समक्ष दायर अपील में तर्क रखा है कि सिंगल जज न्यायमूर्ति मनमोहन ने 4 फरवरी को गलत तरीके से प्रबंधन कोटा रद्द करने संबंधी सरकार के निर्णय पर रोक लगाई है। प्रबंधन कोटे का एक रैकेट है। इसके जरिये स्कूल प्रशासन केपीटेशन फीस यानी अभिभावकों से उगाही करते हैं।
प्रबंधन कोटा दाखिले में छात्रों से भेदभाव होता है
स्कूलों का तर्क है कि प्रबंधन कोटे से नेताओं, अधिकारियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं की सिफारिशों पर दाखिला देकर कर उनका मान रखना पड़ता है, लेकिन सरकार आम बच्चों को दरकिनार कर इसकी इजाजत नहीं दे सकती।
दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष प्रबंधन कोटा खत्म करने संबंधी अपने फैसले को उचित ठहराते हुए उक्त तर्क रखा। याचिका में कहा गया है कि प्रबंधन कोटा दाखिले में छात्रों से भेदभाव होता है। स्कूलों में योग्यता के आधार पर छात्रों को दाखिला मिलना चाहिए। प्रबंधन कोटे का कोई स्तर नहीं है, इसमें पारदर्शिता नहीं है। यही कारण है की इसे खत्म किया गया है।
निदेशालय ने तर्क रखा है कि न्यायमूर्ति मनमोहन इस तथ्य को समझने में विफल रहे हैं कि सरकार के पास नियमों में यह अधिकार है कि वह शिक्षा के मामले में ऐसे निर्णय ले सकती है।
प्रबंधन कोटे पर लगाई गई रोक को बहाल किया जाए
संविधान के अनुच्छेद 239एए के तहत उपराज्यपाल मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करता है और यह फैसला मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया है। याचिका में खंडपीठ से आग्रह किया गया है कि सिंगल जज के फैसले को रद्द कर प्रबंधन कोटे पर लगाई गई रोक को बहाल किया जाए।
पेश मामले में राजधानी के करीब 400 निजी स्कूलों की एक्शन कमेटी व फोरम फॉर प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजुकेशन फॉर ऑल ने सरकार के निर्णय को चुनौती देते हुए अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी।
इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद ही न्यायमूर्ति मनमोहन ने सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी थी।