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Delhi NCR News: कथक की मुद्राओं में साकार हुईं राम-कृष्ण की लीलाएं
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डॉ. उमा शर्मा और शिष्यों के 22वें वार्षिक कार्यक्रम ‘राम-श्याम’ में भक्ति, साहित्य और दर्शन का संगम
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। जन्माष्टमी की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर का सभागार कृष्ण की बाल लीलाओं, राधा-कृष्ण के प्रेम और राम की मर्यादा के रंग में रंगा नजर आया। वरिष्ठ कथक नृत्यांगना डॉ. उमा शर्मा और उनके शिष्यों के 22वें वार्षिक कार्यक्रम ‘राम-श्याम’ में कथक की मुद्राओं, भावाभिनय और संगीत के जरिए राम और कृष्ण के विविध रूपों को जीवंत किया गया।
कृष्ण लीजेंड के तहत आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. उमा शर्मा द्वारा निर्मित लघु फिल्म ‘श्री-राधा’ की स्क्रीनिंग से हुई। इसके बाद उन्होंने ठुमरी-अभिनय की प्रस्तुति दी। मंच पर शिष्यों ने गोवर्धन लीला, माखन चोरी और कालिया मर्दन जैसे प्रसंगों को कथक के जरिए प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कालिया मर्दन में कृष्ण द्वारा विषैले नाग के दमन की कथा को पद संचालन और भावाभिनय के माध्यम से साकार किया गया।
कार्यक्रम में रामायण नृत्य नाटिका के पंचवटी वर्णन को भी प्रस्तुत किया गया। ‘राम-श्याम’ की खासियत रही कि यहां कथक महज नृत्य नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, पौराणिक कथाओं, भक्ति और दर्शन को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बनकर सामने आया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। जन्माष्टमी की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर का सभागार कृष्ण की बाल लीलाओं, राधा-कृष्ण के प्रेम और राम की मर्यादा के रंग में रंगा नजर आया। वरिष्ठ कथक नृत्यांगना डॉ. उमा शर्मा और उनके शिष्यों के 22वें वार्षिक कार्यक्रम ‘राम-श्याम’ में कथक की मुद्राओं, भावाभिनय और संगीत के जरिए राम और कृष्ण के विविध रूपों को जीवंत किया गया।
कृष्ण लीजेंड के तहत आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. उमा शर्मा द्वारा निर्मित लघु फिल्म ‘श्री-राधा’ की स्क्रीनिंग से हुई। इसके बाद उन्होंने ठुमरी-अभिनय की प्रस्तुति दी। मंच पर शिष्यों ने गोवर्धन लीला, माखन चोरी और कालिया मर्दन जैसे प्रसंगों को कथक के जरिए प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कालिया मर्दन में कृष्ण द्वारा विषैले नाग के दमन की कथा को पद संचालन और भावाभिनय के माध्यम से साकार किया गया।
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कार्यक्रम में रामायण नृत्य नाटिका के पंचवटी वर्णन को भी प्रस्तुत किया गया। ‘राम-श्याम’ की खासियत रही कि यहां कथक महज नृत्य नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, पौराणिक कथाओं, भक्ति और दर्शन को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बनकर सामने आया।
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