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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने बिहार के निलंबित विधायक राजू कुमार सिंह की सजा स्थगित करने से किया इन्कार
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिहार के भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह की सजा स्थगित करने की याचिका खारिज कर दी है। सिंह को 2018 में जश्न में गोली चलाने से एक महिला की मौत के मामले में दोषी ठहराया गया था। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने सिंह के आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि मामले के सतही विश्लेषण से ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई स्पष्ट विकृति या गंभीर त्रुटि नहीं दिखाई दी, जिससे सजा पर रोक लगाई जा सके। यह आवेदन सिंह की अपील का हिस्सा था। अदालत ने 29 सितंबर को दिए आदेश में यह भी टिप्पणी की कि साहेबगंज विधायक का अतीत साफ-सुथरा नहीं हैं और अपराध में नैतिक पतन शामिल है। अदालत ने कहा, अपीलकर्ता कथित तौर पर शराब के प्रभाव में था, उसने बंदूक का इस्तेमाल किया और परिणामों को अच्छी तरह जानते हुए भी जश्न में फायरिंग की। बात को और खराब बनाने वाली बात यह है कि आपराधिक इतिहास साफ नहीं हैं। उनके खिलाफ मामलों की लंबी सूची है। कई मामलों में वे बरी हो चुके हैं, लेकिन यह ऐसा मामला नहीं है जहां उनका रिकॉर्ड साफ है सजा स्थगित करने संबंधी वर्तमान आवेदन खारिज किया जाता है।
4 जुलाई को ट्रायल कोर्ट ने सिंह को चार साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। यह घटना 31 दिसंबर 2018 की रात फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नए साल की पार्टी में हुई थी, जिसमें मेहमान अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। सिंह को आईपीसी की धारा 304 भाग-2 और शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत जून में दोषी ठहराया गया था। उच्च न्यायालय ने 27 जुलाई को सजा (कारावास) स्थगित की थी।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिहार के भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह की सजा स्थगित करने की याचिका खारिज कर दी है। सिंह को 2018 में जश्न में गोली चलाने से एक महिला की मौत के मामले में दोषी ठहराया गया था। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने सिंह के आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि मामले के सतही विश्लेषण से ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई स्पष्ट विकृति या गंभीर त्रुटि नहीं दिखाई दी, जिससे सजा पर रोक लगाई जा सके। यह आवेदन सिंह की अपील का हिस्सा था। अदालत ने 29 सितंबर को दिए आदेश में यह भी टिप्पणी की कि साहेबगंज विधायक का अतीत साफ-सुथरा नहीं हैं और अपराध में नैतिक पतन शामिल है। अदालत ने कहा, अपीलकर्ता कथित तौर पर शराब के प्रभाव में था, उसने बंदूक का इस्तेमाल किया और परिणामों को अच्छी तरह जानते हुए भी जश्न में फायरिंग की। बात को और खराब बनाने वाली बात यह है कि आपराधिक इतिहास साफ नहीं हैं। उनके खिलाफ मामलों की लंबी सूची है। कई मामलों में वे बरी हो चुके हैं, लेकिन यह ऐसा मामला नहीं है जहां उनका रिकॉर्ड साफ है सजा स्थगित करने संबंधी वर्तमान आवेदन खारिज किया जाता है।
4 जुलाई को ट्रायल कोर्ट ने सिंह को चार साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। यह घटना 31 दिसंबर 2018 की रात फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नए साल की पार्टी में हुई थी, जिसमें मेहमान अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। सिंह को आईपीसी की धारा 304 भाग-2 और शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत जून में दोषी ठहराया गया था। उच्च न्यायालय ने 27 जुलाई को सजा (कारावास) स्थगित की थी।
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