'पुलिस अधिकारी जानबूझकर खामियां छोड़ते हैं ताकि मजबूर हो जाए अदालत '
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यह टिप्पणी अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में आरोपी सरकारी अधिकारी को आरोपमुक्त करते हुए की है। तीस हजारी अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हिमानी मल्होत्रा ने दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग में अधिकारी को भ्रष्टाचार के आरोप से मुक्त करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के अधिकारियों ने चार्जशीट बेहद घटिया तरीके से दाखिल की थी।
अदालत ने अपने फैसले कहा कि जिस तरह से चार्जशीट दाखिल की गई उससे साफ है एसीबी के इंस्पेक्टर राकेश कुमार व एसीपी महेंद्र पाल ने जानबूझकर साक्ष्यों का निरीक्षण नहीं किया।
इस केस की सुनवाई के दौरान की टिप्पणी
अदालत ने परिवहन विभाग के अधिकारी राजीव कुमार अरोड़ा को आरोपमुक्त करते हुए कहा कि उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। एसीबी की चार्जशीट के मुताबिक परिवहन विभाग के कर्मचारी केके शर्मा ने 5 नवंबर 2012 को एसीबी में शिकायत दी थी।
उसका कहना था कि वह 30 नवंबर 2012 को रिटायर होने वाला है और उसकी पेंशन की फाइल चलाने के लिए अरोड़ा 50 हजार रुपये की घूस मांग रहा है। इस घूस की पहली किस्त अरोड़ा ने 5 नवंबर 2012 को मांगी थी।
अभियोजन के मुताबिक एसीबी ने छापा डालकर अरोड़ा को घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। अदालत ने अरोड़ा को आरोप मुक्त करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता व गवाह के बयान से साफ है आरोपी ने घूस की मांग नहीं की थी। उसने शुरुआत में पैसा लेने से मना किया था और इसके बाद शिकायतकर्ता ने खुद पैसा उसकी जेब में रखा था।