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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The Commission provided the BLO's name and number, but when I called, the person asked, "Who are you?"

Delhi NCR News: बीएलओ का नाम-नंबर आयोग ने भेजा, फोन किया तो बोले- आप कौन?

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 06:19 PM IST
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ग्राउंड रिपोर्ट:मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में आवेदकों की बढ़ी परेशानी, सत्यापन के लिए बार-बार बदल रहे बीएलओ
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नितिन राजपूत
नई दिल्ली। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू करते ही आवेदक नई उलझन में फंस रहे हैं। फॉर्म-6 भरने के बाद चुनाव आयोग की ओर से मोबाइल पर भेजे जा रहे संदेशों में सत्यापन के लिए अलग-अलग बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के नाम और नंबर सामने आ रहे हैं। परेशानी तब बढ़ जाती है, जब आवेदक संदेश में दिए गए नंबर पर संपर्क करते हैं और संबंधित बीएलओ उन्हें अपना आवेदक मानने से ही इन्कार कर देते हैं। यानी आयोग के संदेश में जिस अधिकारी को सत्यापन की जिम्मेदारी दी जा रही है, फोन पर वही अधिकारी इससे अनजान नजर आता है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां मतदाता बनने की पहली सीढ़ी पर ही आवेदकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नजफगढ़ के रोशन गार्डन के पंकज को एक ही दिन में तीन बार बीएलओ बदलने के संदेश मिले। उन्होंने सभी बीएलओ को फोन किया, लेकिन जवाब मिला कि उन्हें नहीं पता कि आवेदक कौन हैं और उनका नाम सूची में नहीं है। इसी तरह राज को भी बीएलओ बदलने का संदेश मिलने के बाद नए अधिकारी को फोन करने पर ऐसा ही जवाब सुनने को मिला। राज ने जब कहा कि चुनाव आयोग ने ही उनका नाम और नंबर भेजा है, तो वह किससे संपर्क करें? इस पर बीएलओ ने जवाब दिया कि उनके पास आवेदक का नाम नहीं है और वह कहीं भी जाकर शिकायत कर सकते हैं। वहीं, संगम विहार के विवेक ने अपने बीएलओ से जानकारी लेने के लिए फोन किया तो नाम और पता बताते ही अधिकारी ने कह दिया कि उनका पता उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। जबकि विवेक के मोबाइल पर आए संदेश और एसआईआर के फॉर्म पर उसी बीएलओ का नाम और नंबर दर्ज था।
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तीन दिन में दो बार बदले बीएलओ
नजफगढ़ निवासी सन्नी के अनुसार, किसी कारणवश विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में उनका नाम मतदाता सूची से हट गया था। इसके बाद उन्होंने कुछ दिन पहले चुनाव आयोग की वेबसाइट के माध्यम से फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया। 24 सितंबर को उनके मोबाइल पर संदेश आया कि आवेदन के सत्यापन के लिए एक बीएलओ नियुक्त किया गया है। अभी वह प्रक्रिया को समझ ही रहे थे कि 27 सितंबर को एक और संदेश आ गया। इसमें पहले बताए गए बीएलओ की जगह दूसरे अधिकारी का नाम और नंबर दिया गया था। सन्नी के मुताबिक, यह परेशानी केवल उनकी नहीं, बल्कि सैकड़ों आवेदकों की है।
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सत्यापन की जिम्मेदारी से अनजान अधिकारी
बीएलओ बदलने के संदेश मिलने के बाद कई आवेदकों ने नए नंबरों पर संपर्क कर सत्यापन की प्रक्रिया जाननी चाही। इस दौरान उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि वे संबंधित अधिकारी के क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं। कुछ आवेदकों का दावा है कि आयोग के संदेश का हवाला देने पर बीएलओ ने नाराजगी जताई और शिकायत करने की बात कहकर फोन पर जवाब दिया। नजफगढ़ निवासी राहुल बताते हैं कि संदेश में जिस अधिकारी का नंबर दिया गया था, उससे संपर्क करने पर पता चला कि वह संबंधित क्षेत्र का बीएलओ ही नहीं है। ऐसे में आवेदकों के सामने यह सवाल खड़ा हो रहा है कि जब आयोग की ओर से सत्यापन के लिए अधिकारी का नाम और नंबर भेजा जा रहा है, तो संबंधित अधिकारी आवेदक को पहचानने से इन्कार क्यों कर रहे हैं। आम मतदाता के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि वह आयोग के संदेश पर भरोसा करे या बीएलओ के जवाब पर।
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