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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The city's biggest challenge will be in the entry in top 20 smart cities.

शहर के लिए टॉप 20 स्मार्ट सिटी में एंट्री करना चैलेंज

Sat, 29 Aug 2015 10:55 AM IST
भोला पाण्डेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
भोला पाण्डेय/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sat, 29 Aug 2015 10:55 AM IST
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The city's biggest challenge will be in the entry in top 20 smart cities.

स्मार्ट सिटी की सूची में अपने शहर का नाम आने से बेशक हम अपनी पीठ थपथपा लें लेकिन टॉप 20 स्मार्ट सिटी में जगह बनाना आसान नहीं होगा।

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इसके लिए फरीदाबाद नगर निगम को कठिन परीक्षा से गुजरना होगा। अभी शहर के जो हालात हैं उससे कहीं नहीं लगता है कि फरीदाबाद टॉप 20 की सूची में जगह बना पाएगा।

नवंबर तक नगर निगम को डीपीआर बनाकर देना है। देशभर के 100 शहरों की डीपीआर की मॉनिटरिंग होगी और दिसंबर में पहले चरण के 20 स्मार्ट शहरों के नाम की घोषणा की जाएगी।
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नगर निगम के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर डीआर भाष्कर का कहना है कि डीपीआर के लिए राज्य सरकार की ओर से एजेंसी हायर की जाएगी। नवंबर तक डीपीआर सबमिट करना है। निगम का प्रयास होगा कि फरीदाबाद टॉप 20 में जगह बनाने में कामयाब हो।

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कैसे बनेगी स्मार्ट सिटी?

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जन सुविधाओं का बुरा हाल-
यहां की एक बड़ी आबादी आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। पूरे शहर की सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे नजर आ रहे हैं। अधिकांश कॉलोनियों में सीवर का बुरा हाल है।

कॉलोनी की सड़कों पर पानी भरा रहता है। गर्मी की शुरुआत होते ही पेयजल के लिए नगर निगम में मटके फूटते रहते हैं। सीवर जाम और पानी निकासी के लिए आए दिन सड़क जाम होते हैं।

हर तीन-चार घंटे में बिजली कटौती कर दी जाती है। सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। रेलवे स्टेशन से लेकर बस अड्डे तक, प्रमुख बाजारों में गंदगी का ढेर लगा हुआ है।

सवाल यह उठता है कि क्या इसी आधार पर हमारा शहर प्रथम चरण की लिस्ट में शामिल हो पाएगा, यह कह पाना मुश्किल है।

750 करोड़ रुपये में भी नहीं बदली सूरत

The city's biggest challenge will be in the entry in top 20 smart cities.

वर्ष 2007-08 में जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिनुअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत नगर निगम को 750 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने दिए थे।

उक्त फंड से निगम को शहर की सीवर, पानी और हाउसिंग की बेहतर व्यवस्था करनी थी। लेकिन कंगाली से जूझ रहे निगम ने उक्त पैसों का उपयोग कर्मचारियों का वेतन बांटने में खर्च कर दिया।

प्रोजेक्ट पूरा करने की बात तो दूर की है। इस फंड का सबसे बड़ा पेयजल प्रोजेक्ट आज तक पूरा नहीं हुआ। ऐसे में स्मार्ट सिटी के नाम पर मिलने वाले 600 करोड़ रुपये में निगम क्या कर पाएगा, खुद अंदाजा लगाइए।

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