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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The challenge of encroachment on ponds in Delhi; directives issued to restore Kanganheri pond.

Delhi NCR News: दिल्ली में तालाबों पर कब्जे की चुनौती, कंगनहेड़ी तालाब बहाल करने के निर्देश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2026 09:36 PM IST
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दूसरी जल निकाय गणना में राजधानी के 646 जल निकायों में से 205 पर मिला अतिक्रमण, तालाबों पर कब्जे का आंकड़ा भी बढ़ा
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के कंगनहेड़ी गांव स्थित तालाब को अतिक्रमण मुक्त कर उसके मूल स्वरूप में बहाल करने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार अतिक्रमण हटाने और तालाब के बचे हुए हिस्से को भविष्य में कब्जे से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। अतिक्रमण हटाने के बाद खाली होने वाली अतिरिक्त जमीन को भी तालाब की बहाली में शामिल करना होगा। यह आदेश ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में जल निकायों पर अतिक्रमण की समस्या गंभीर बनी हुई है।
जल शक्ति मंत्रालय की दूसरी जल निकाय गणना में राजधानी के 646 जल निकाय दर्ज किए गए थे। इनमें से 205 पर अतिक्रमण पाया गया, जो कुल संख्या का करीब 31.7 फीसदी है। तालाबों की स्थिति भी चिंताजनक है। पहली गणना में 525 तालाबों में से 66 पर अतिक्रमण मिला था, जबकि दूसरी गणना में 537 तालाबों में से 143 पर कब्जा दर्ज किया गया। इस तरह तालाबों में अतिक्रमण का अनुपात 12.6 फीसदी से बढ़कर 26.6 फीसदी हो गया।
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13 बीघा 10 बिस्वा के तालाब पर कब्जे का आरोप
यह मामला सुरेश चंद की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि कंगनहेड़ी गांव में 13 बीघा 10 बिस्वा क्षेत्रफल वाले तालाब पर अवैध कब्जा किया गया है। एनजीटी ने 23 सितंबर 2024 को संबंधित अधिकारियों को तालाब को उसके मूल आकार में बहाल करने और अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। आदेश का पालन नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने 2026 में निष्पादन याचिका दायर की।
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-सुनवाई के दौरान तालाब की सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनाने का मुद्दा भी उठा। 27 जुलाई 2026 के आदेश में अधिकरण ने पक्की चारदीवारी बनाने को उचित नहीं माना। उसका कहना था कि ऐसी दीवार बारिश के पानी और सतही जल के बहाव को रोक सकती है, जिससे तालाब में पानी पहुंचने में बाधा आती है। इसलिए पक्की दीवार के बजाय बायो-फेंसिंग यानी प्राकृतिक बाड़ लगाने के निर्देश दिए गए।
सीमांकन नक्शे से दूर हुई स्थिति की अस्पष्टता
8 सितंबर 2026 को एनजीटी ने पाया कि प्रस्तुत नक्शे में तालाब के उत्तरी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों की सीमाएं और माप स्पष्ट नहीं थे। इसके बाद दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट को पूरे नक्शे के साथ अतिरिक्त रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
13 अक्तूबर 2026 को सुनवाई के दौरान मटियाला के तहसीलदार राकेश कुमार सिंह व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और तालाब का मूल सीमांकन नक्शा प्रस्तुत किया। याचिकाकर्ता ने भी नक्शे में दर्शाए गए क्षेत्र को सही माना और कोई आपत्ति नहीं जताई। एनजीटी ने निर्देश दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों के अधीन तथा कानून के अनुसार की जाए। तालाब के शेष हिस्से को भविष्य में कब्जे से बचाने के लिए भी जरूरी उपाय करने होंगे।

डीडीए के 811 जल निकायों की स्थिति
14 फरवरी 2025 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, डीडीए ने एनजीटी को बताया था कि उसके अधिकार क्षेत्र में 811 जल निकाय पहचाने गए हैं। इनमें 427 बहाली योग्य और 247 बहाली के लिए अनुपयुक्त बताए गए थे। कुल 174 जल निकाय विकसित किए जा चुके थे। वहीं, 320 का सीमांकन पूरा नहीं हुआ था, 100 दूसरे विभागों से डीडीए को हस्तांतरित नहीं किए गए थे और 24 खसरा सत्यापन की प्रक्रिया में अटके थे।
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स्रोत: जल शक्ति मंत्रालय की पहली और दूसरी जल निकाय गणना; डीडीए के आंकड़ों पर 14 फरवरी 2025 को प्रकाशित रिपोर्ट।
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