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Delhi NCR News: घर बेचने के नाम पर 15 लाख की ठगी करने वाला फरार आरोपी धरा
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2014 में घर बेचने के नाम पर 15 लाख एडवांस लेकर दूसरे को बेचा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 15 लाख की ठगी के मामले में फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसे उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के कृष्णा विहार इलाके से पकड़ा गया। वहीं इस मामले में आरोपी की पत्नी अब भी फरार है। आरोपी ने पत्नी के साथ मिलकर 2014 में घर बेचने के नाम पर धोखाधड़ी की थी।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त हर्ष इंदौरा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान 43 वर्षीय अरुण शर्मा के रूप में हुई है। उसे वर्ष 2015 में दिल्ली की एक अदालत ने उसकी पत्नी के साथ भगोड़ा अपराधी घोषित किया था। वर्ष 2014 में, आर्थिक संकट से जूझ रहे अरुण ने शिकायतकर्ता जितेंद्र ढींगरा से रोहिणी सेक्टर-16 स्थित अपना मकान 65 लाख में बेचने का समझौता किया और एडवांस के तौर पर 15 लाख ले लिए। लेकिन बाद में उसने वही संपत्ति किसी और को बेच दी और शिकायतकर्ता ढींगरा के पैसे लेकर फरार हो गया। संपत्ति अरुण की पत्नी के नाम पर दर्ज थी और बिक्री का एग्रीमेंट भी उनके नाम पर ही किया गया था।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि ढींगरा ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई। जांच में यह पाया गया कि यह एक साजिश थी, जिसमें अरुण की पत्नी भी शामिल थी। पुलिस ने बताया कि आरोपी अरुण लंबे समय तक गुजरात के वडोदरा में रह रहा था और वहीं लोगों से धोखाधड़ी करता रहा। हाल ही में वह दिल्ली लौटा और कृष्णा विहार में किराये के मकान में रह रहा था। टीम ने छापा मार कर उसे दबोच लिया। पूछताछ के दौरान शुरुआत में अरुण ने अपनी पहचान से इनकार किया, लेकिन बाद में उसने धोखाधड़ी में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। पुलिस के अनुसार, अरुण पहले करोल बाग में रेडीमेड कपड़ों का कारोबारी था, लेकिन कारोबार में नुकसान के बाद उसने ठगी का रास्ता अपना लिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 15 लाख की ठगी के मामले में फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसे उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के कृष्णा विहार इलाके से पकड़ा गया। वहीं इस मामले में आरोपी की पत्नी अब भी फरार है। आरोपी ने पत्नी के साथ मिलकर 2014 में घर बेचने के नाम पर धोखाधड़ी की थी।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त हर्ष इंदौरा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान 43 वर्षीय अरुण शर्मा के रूप में हुई है। उसे वर्ष 2015 में दिल्ली की एक अदालत ने उसकी पत्नी के साथ भगोड़ा अपराधी घोषित किया था। वर्ष 2014 में, आर्थिक संकट से जूझ रहे अरुण ने शिकायतकर्ता जितेंद्र ढींगरा से रोहिणी सेक्टर-16 स्थित अपना मकान 65 लाख में बेचने का समझौता किया और एडवांस के तौर पर 15 लाख ले लिए। लेकिन बाद में उसने वही संपत्ति किसी और को बेच दी और शिकायतकर्ता ढींगरा के पैसे लेकर फरार हो गया। संपत्ति अरुण की पत्नी के नाम पर दर्ज थी और बिक्री का एग्रीमेंट भी उनके नाम पर ही किया गया था।
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पुलिस उपायुक्त ने बताया कि ढींगरा ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई। जांच में यह पाया गया कि यह एक साजिश थी, जिसमें अरुण की पत्नी भी शामिल थी। पुलिस ने बताया कि आरोपी अरुण लंबे समय तक गुजरात के वडोदरा में रह रहा था और वहीं लोगों से धोखाधड़ी करता रहा। हाल ही में वह दिल्ली लौटा और कृष्णा विहार में किराये के मकान में रह रहा था। टीम ने छापा मार कर उसे दबोच लिया। पूछताछ के दौरान शुरुआत में अरुण ने अपनी पहचान से इनकार किया, लेकिन बाद में उसने धोखाधड़ी में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। पुलिस के अनुसार, अरुण पहले करोल बाग में रेडीमेड कपड़ों का कारोबारी था, लेकिन कारोबार में नुकसान के बाद उसने ठगी का रास्ता अपना लिया।
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