आतंकियों ने इस शहर में छुपा कर रखे हैं हथियार!
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आतंकियों का ‘मूवमेंट प्वाइंट’ रहा यह शहर गणतंत्र दिवस से पहले एक बार फिर खुफिया तंत्र के रडार पर है। खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि दिल्ली और पटना में वारदात को अंजाम देने के लिए इस शहर में हथियार छिपाए गए हैं।
दिल्ली के निशाने का ‘रिमोट’ फरीदाबाद में होने की रिपोर्ट के बाद शहर की सीआईडी ने जिला पुलिस को व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं।
हालांकि हथियार या आतंकियों के शहर में छिपे होने से पुलिस अधिकारी इनकार कर रहे हैं, लेकिन शहर की सुरक्षा बढ़ाए जाने और तलाशी अभियान चलाया जाना स्वीकार रहे हैं।
दिल्ली और पटना में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने के लिए चार माह पूर्व करीब दस आतंकी काठमांडू के रास्ते भारत में घुसे थे।
ढीली-ढाली सुरक्षा व्यवस्था और दिल्ली से सटा होने की वजह से इन आतंकियों की ओर से हथियार और विस्फोटक फरीदाबाद और गाजियाबाद में छिपाए जाने की आशंका खुफिया एजेंसियों ने व्यक्त की है।
आसान है यहां ठिकाना बनाना
पुलिस आयुक्त सुभाष यादव ने बताया कि अभी तक उनके पास इस तरह का कोई पत्र नहीं पहुंचा है। जहां तक सुरक्षा व्यवस्था की बात है, एक जनवरी और गणतंत्र दिवस के मद्देनजर महत्वपूर्ण जगहों पर कमांडो दस्ते तैनात किए गए हैं। रूटीन तलाशी अभियान भी चल रहा है।
दिल्ली की सेटेलाइट सिटी फरीदाबाद में ठिकाना बनाना बहुत आसान है। शहर की पुलिस न तो होटलों में आने जाने वालों का रिकॉर्ड चेक करती है और न ही किरायेदारों का वेरिफिकेशन होता है।
यही वजह है कि करीब एक दर्जन आतंकी घटनाओं के आरोपियों के तार इस शहर से जुड़े हैं। इस शहर में आतंकी आकर रहे भी और हथियारों का जखीरा भी छिपाया।
मकान मालिक करते हैं गलती
1998 में आतंकी घटना के तार शहर से जुड़ने के बाद से आज तक पुलिस ने एक बार भी यहां आतंकियों या उनके एजेंटों की धरपकड़ के लिए कोई अभियान नहीं चलाया। हर बार दिल्ली पुलिस ही यहां आतंकियों को ट्रेस करती हुई पहुंची।
शहर में अनधिकृत ढंग से बांग्लादेशी भी खासी तादाद में हैं। मकान मालिक की ओर से किरायेदार रखने की बाबत सूचना थाने में देने के आदेश जिले में अभी तक अमल में नहीं आए हैं।
मकान मालिक अच्छा किराया मिलने पर यह जानने में भी दिलचस्पी नहीं लेते कि जिस व्यक्ति को वह अपना मकान दे रहे हैं, वह कहीं संदिग्ध तो नहीं है। बल्लभगढ़ की जगदीश कॉलोनी में पाकिस्तान मूल के लश्करे तायबा के आतंकी को आसानी से मकान मिल गया था।
फरीदाबाद से कब-कब जुड़े मिले आतंकियों के तार
-वर्ष 1998 में दिल्ली पुलिस ने तुगलकाबाद किले के पास मुठभेड़ में आतंकियों को मार गिराया था। ये आतंकी फरीदाबाद से सूरजकुंड रोड के रास्ते दिल्ली में घुसने का प्रयास कर रहे थे।
-नवंबर 2008-मालेगांव ब्लास्ट में गिरफ्तार आरोपी दयानंद पांडे उर्फ अमृतानंद देव कई वर्षों तक अनंगपुर स्थित हरि पर्वत मंदिर में रहा।
-अक्तूबर 2008-मालेगांव ब्लास्ट में गिरफ्तार आरोपी लेफ्टीनेंट कर्नल पुरोहित के फरीदाबाद के आनंद आश्रम में बैठक कर हथियार देने की बात सामने आई।
महरौली ब्लास्ट के जुड़े थे तार
-सितंबर 2008 महरौली ब्लास्ट की पूर्व रात्रि एक कॉल पुलिस को दिल्ली बचाने के लिए की गई थी, इसमें प्रयोग सिम बल्लभगढ़ से खरीदा गया था।
-वर्ष 2007 में हैदराबाद बम ब्लास्ट के मामले में प्रयुक्त मोबाइल फोन ओल्ड फरीदाबाद अनाज मंडी की एक दुकान से खरीदा गया था।
-वर्ष 2006 में पाकिस्तानी आतंकी अबू हमजा जगदीश कॉलोनी बल्लभगढ़ में उत्तर चंद बरेजा के मकान में किराये पर रह रहा था। मई 2006 में दिल्ली पुलिस ने छापेमारी कर वहां से तीन किलो आरडीएक्स सहित हथियारों का भारी जखीरा पकड़ा था।
रेलवे स्टेशन उड़ाने की मिली धमकी
-2006: मार्च व अप्रैल में तीन बार अलबदर नाम के आतंकी संगठन ने एसएसपी व जीआरपी को पत्र भेजकर ओल्ड व न्यू टाउन रेलवे स्टेशन को उड़ाने की धमकी दी।
-वर्ष 2005 के जुलाई माह में गुवाहाटी व नोएडा पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर शहर के गांधी नगर से दो महिलाओं व दौलताबाद निवासी एक व्यक्ति को आईएसएस एजेंट होने पर गिरफ्तार किया था।
-वर्ष 2005 में नोएडा पुलिस ने आतंकी हनीफ को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में बताया कि हनीफ ने दो साल फरीदाबाद में रहकर अपना नेटवर्क चलाया था।
पटरी पर मिला जिंदा बम
-वर्ष 2005 में ही मुजेसर फाटक के समीप पटरी से जिंदा बम बरामद हुए थे। एफएसएल की रिपोर्ट ने इन बमों को ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन के लिए घातक बताया गया था।
-अगस्त 2004 में बीएसएफ का पूर्व सिपाही बल्लभगढ़ स्टेशन से पकड़ा गया। यह मेवात में रहकर आईएसआई के लिए कार्य कर रहा था।
-वर्ष 2004 में दिल्ली पुलिस ने आतंकी आबिद को मार गिराया था। बाद में जांच करने पर पता चला कि आबिद के तार फरीदाबाद से जुड़े थे। उसने दिल्ली में घूमने के लिए मोटरसाइकिल भी फरीदाबाद से ही खरीदी थी।