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आतंक से जूझ रहे अफगानी यहां दिखा रहे हुनर
ब्यूरो/ अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 03 Feb 2015 07:54 PM IST
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आतंकवाद से जूझ रहे अफगानिस्तानी कालीनों के जरिए दुनियाभर में अपने हाथ के हुनर को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। कालीन शिल्पकार 29वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में हाथ से तैयार किए गए कालीनों को प्रदर्शित किया है।
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हट नंबर एफसी-25 के संचालक मोहम्मद जान ने बताया कि वह इस मेले में पिछले सात सालों से लगातार आ रहे हैं। यहां के लोगों की पसंद केअनुसार कुछ नई व नायाब कालीनों की कारीगरी को प्रस्तुत किया है।
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चार हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक की कालीनों को प्रस्तुत किया है। जान का कहना है कि कालीन जितनी पुरानी होती है उतना ही महंगा होती है। इसमें प्राकृतिक रंगों को इस्तेमाल किया जाता है।
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अफगानी महिलाएं इन कालीनों को बनाने में व तैयार करने में अपनी अहम भूमिका अदा करती है। एक कालीन बनाने में चालीस दिन कम से कम का समय लगता है और अधिक से अधिक नौ महीने का समय लगता है। कालीनों को बनाने में भेड़ और ऊंट के ऊन का उपयोग किया जाता है।