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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Telecom PoS agent arrested for selling pre-activated SIM cards to cyber fraudsters.

Delhi NCR News: साइबर ठगों को प्री-एक्टिवेटेड सिम बेचने वाला टेलीकॉम पीओएस एजेंट गिरफ्तार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 07:10 PM IST
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केवाईसी और बायोमेट्रिक नियमों की अनदेखी कर सक्रिय किए 11 सिम, 18 साइबर ठगी के मामलों में हुए इस्तेमाल
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सेंट्रल जिला साइबर थाना पुलिस ने साइबर अपराधियों को अवैध रूप से प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक लाइसेंसधारी टेलीकॉम पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) एजेंट को गिरफ्तार किया है। आरोपी की ओर से सक्रिय किए गए 11 सिम कार्ड देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 18 से अधिक साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल किए गए। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

सेंट्रल जिला के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन नियमों का उल्लंघन कर साइबर अपराधियों तक प्री-एक्टिवेटेड सिम पहुंचाने वाले गिरोहों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में दिल्ली के उन टेलीकॉम पीओएस एजेंटों की जांच की गई, जिनके माध्यम से जारी सिम कार्ड बार-बार साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे थे। जांच के दौरान शिवा सिम्स, नीतीश टेलीकॉम और शिवम टेलीकॉम संदेह के घेरे में आए।
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एसएचओ योगराज दलाल के नेतृत्व में हुई जांच में खुलासा हुआ कि शिवम टेलीकॉम के जरिए अवैध रूप से सक्रिय किए गए 11 सिम कार्ड देशभर में दर्ज 18 साइबर ठगी के मामलों में उपयोग किए गए। इसके बाद पुलिस ने दो जुलाई को हिंदूराव अस्पताल के पास से बलजीत नगर निवासी शिवा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी सड़क किनारे अस्थायी स्टॉल लगाकर 'शिवम टेलीकॉम' के नाम से लाइसेंसधारी टेलीकॉम पीओएस एजेंट के रूप में कार्य कर रहा था।
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पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ग्राहकों के पहचान पत्र और बायोमेट्रिक विवरण का दुरुपयोग कर उनकी जानकारी और सहमति के बिना अतिरिक्त सिम कार्ड सक्रिय करता था। बाद में इन्हें बिचौलियों के जरिए साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल ठग लोगों से संपर्क करने, वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल पेमेंट खाते खोलने और अपनी पहचान छिपाने के लिए करते थे। पुलिस के अनुसार आरोपी जानबूझकर केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया का उल्लंघन कर रहा था। मामले में आगे की जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य एजेंटों व बिचौलियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

500-600 रुपये में बिकता था प्री-एक्टिवेटेड सिम
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी प्रत्येक प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड 500 से 600 रुपये में बिचौलियों और साइबर अपराधियों को बेचता था। ये सिम बिना वास्तविक उपभोक्ता की जानकारी के सक्रिय किए जाते थे।


असली ग्राहकों के दस्तावेज से तैयार हुआ फर्जीवाड़ा करने वालों का नेटवर्क
पुलिस के अनुसार आरोपी असली ग्राहकों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम जारी करता था। इन सिम कार्डों का उपयोग साइबर ठग वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल खातों के संचालन और अपनी पहचान छिपाने के लिए करते थे।
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