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'राम' को सूरजकुंड से ही मिला नाम और दाम
ओम प्रकाश/ अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 10 Feb 2014 07:31 PM IST
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अंतरराष्ट्रीय हो चुका सूरजकुंड मेला बुनकरों और शिल्पियों को विदेशी धरती से बिजनेस आर्डर दिला रहा है। जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे नाम भी कमा रहे हैं।
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ऐसे ही एक बुनकर हैं नेपाल के तेज नारायण राम। उनकी बनाई पशमीना शॉल की गुणवत्ता देखकर स्विटजरलैंड से लेकर फ्रांस और जर्मनी तक के सैलानी फिदा हो गए।
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राम बताते हैं पिछले छह साल में उन्हें मेले के जरिए कम से कम तीन करोड़ रुपये का कारोबार करने में सफलता हासिल हुई है। जितना सामान यहां बिकता है उससे कहीं अधिक का आर्डर मिलता है, जिसके जरिए वर्षों तक रेगुलर आय होती रहती है।
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इस मेले के जरिए ही स्विजटरलैंड की एक पार्टी ने कनाडा के बर्फीले पहाड़ों में पाए जाने वाले कीविया नामक जानवर के बाल से तेज नारायण द्वारा शॉल बनवानी शुरू की, जिसे अब स्विटजरलैंड में बेचा जा रहा है। तेज नारायण ने अब ठंडी जलवायु वाले देशों के लिए पशमीना और कीविया दोनों को मिलाकर शॉल बनाना शुरू किया है।
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अमेरिका, जापान एवं इंग्लैंड में पशमीना की खासी मांग है। मेले की वजह से और कई देशों के सैलानी संपर्क में आ रहे हैं जिससे कारोबार बढ़ रहा है। नेपाल से इस कारोबार को दुनिया भर में फैलाने वाली पूजा भारती कहती हैं कि जितनी हल्की शॉल उतना अधिक दाम। एक पशमीना शॉल का वजन 50 ग्राम है और दाम सात से 10 हजार। शॉल मशहूर है इसलिए इसके कद्रदान भी बहुत हैं। इसकी खासियत शरीर की गर्मी को लेकर उसे और बढ़ा देने की है।
तेज नारायण ही कहानी इंग्लैंड के गार्जियन अखबार तक पहुंची। गार्जियन ने ऐसे लोगों पर निकाली गई अपनी पत्रिका ‘एक्सक्लूसिव-विंटर’ में इन्हें जगह दी।
न्यूजीलैंड, स्वीडेन से मिला आर्डर
तंजौर पेंटिंग के लिए नेशनल अवार्डी वी. पन्नियर सालवम कहते हैं कि वह मेले में कई साल से आ रहे हैं। हर साल आठ से 10 लाख रुपये का सामान बिक जाता है। न्यूजीलैंड, स्वीडेन सहित कई देशों के आर्डर भी मिले हैं।
यहां न कटता है बिल और न लगता है टैक्स
सूरजकुंड मेले में आने वाले बुनकरों एवं शिल्पियों से सरकार यहां होने वाली बिक्री पर कोई टैक्स नहीं लेती। इसलिए इसे लेकर कोई बिल नहीं काटा जाता। इस तरह यहां उन्हें खूब फायदा मिलता है।