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डॉक्टर, टीचर्स और छात्रों के दल भी पहुंचे किसानों के समर्थन में सिंघु बॉर्डर, हर छुट्टी वाले दिन करें दिल्ली कूच
Sat, 05 Dec 2020 10:41 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sat, 05 Dec 2020 10:41 PM IST
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किसान आंदोलन को अपना समर्थन देने आए लोग
- फोटो : amar ujala
नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने जहां राजधानी के अलग-अलग बॉर्डर का घेराव किया हुआ है। वहीं अब किसानों के साथ महत्वपूर्ण सेवाएं देने वाले लोग भी शामिल हो रहे हैं। शनिवार को डॉक्टर, टीचर्स और छात्रों के कई दल सिंघु बॉर्डर पर उनका समर्थन व सेवाएं देने पहुंचे। इनका कहना था कि हम अपनी-अपनी नौकरी से बंधे हुए है, लेकिन जब भी उनकी छुट्टी होगी व किसानों के साथ खड़े मिलेंगे। पंजाब के अलग-अलग शहरों से आए टीचर्स तो अपने-अपने परिवारों के साथ सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे थे। वहीं अलग-अलग विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के छात्र भी शनिवार को यहां दिखे।
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फोर्टिस अस्पताल लुधियाना के डॉ. मंदीप सिंह सैनी ने बताया कि वह अस्पताल में एमडी मेडिसिन हैं। उनके परिवार के लोग भी किसान हैं। शनिवार को अस्पताल से उनकी छुट्टी थी तो वह अपने साथियों के साथ सिंघु बॉर्डर किसानों के समर्थन में पहुंचे थे। डॉ. मंदीप ने बताया कि वह यहां पहुंचकर लोगों का इलाज करने के अलावा उनको कोविड से बचने की सलाह दे रहे हैं। दूसरी ओर रघुनाथ अस्पताल लुधियाना के डॉ. गुरप्रकाश व नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष और उनके कई अन्य साथी किसानों के समर्थन में आए थे। गुरप्रकाश ने बताया कि वह अपने साथ चार से पांच लाख की दवाई मुफ्ट में बांटने के लिए लाए हैं।
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डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रेंड के साथ आई टीचर सोनिया ने बताया कि वह पटियाला के सीनियर सेकंडरी स्कूल में टीचर हैं। वह 100 टीचर्स के एक दल के साथ आई हैं। शनिवार को उनकी छुट्टी थी। सभी टीचर्स के साथ उनके परिवार भी हैं। एक अन्य टीचर ममता ने बताया कि ऐसा तो शायद अंग्रेजों के समय भी नहीं होता था। सरकार अपनी मर्जी से कोई भी कानून बना लेती है, किसी भी किसान ने कृषि सुधार के लिए सरकार से नहीं कहा था। सरकार ने बड़े-बड़े घराने के लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसे कानून बनाए हैं। टीचर्स के अलावा लुधियाना, पटियाला, रोपड़, शामली के कुछ छात्र संगठन किसानों का साथ देने सिंघु बॉर्डर आए थे।
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