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डीयू में परीक्षा के बीच शिक्षकों की हड़ताल, चार दिसंबर से काम नहीं करेंगे प्रोफेसर
Sun, 01 Dec 2019 06:02 PM IST
Avdhesh Kumar
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sun, 01 Dec 2019 06:02 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
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दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। लेकिन परीक्षा के बीच डीयू के शिक्षकों ने हड़ताल पर जाने का फैसला कर छात्रों का भविष्य अधर में डाल दिया है। शिक्षकों के संगठन डूटा ने घोषणा की है कि चार दिसंबर से उससे जुड़े सभी शिक्षक हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल विश्वविद्यालय प्रशासन के उस निर्देश के बाद बुलाई गई है जिसमें सभी कॉलेजों को एड-हॉक टीचर्स की नियुक्ति करने से रोक दिया गया है।
कॉलेजों को एड-हॉक प्रोफेसरों की जगह ‘गेस्ट टीचर्स’ की नियुक्ति करने का निर्देश दिया गया है। इस हड़ताल से दिल्ली विश्वविद्यालय के लाखों छात्रों पर सीधा असर पड़ेगा क्योंकि डीयू में गत 27 नवंबर से ही परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। परीक्षाएं दिसंबर माह के अंत तक चलेंगी। हड़ताल के कारण परीक्षा होने और कापियों के मूल्यांकन में बाधा पड़ेगी।
रविवार को एक पत्र जारी कर दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने अपने इस फैसले की जानकारी दी। पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निर्णय से 4500 एड-हॉक प्रोफेसर की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है। संगठन ने कहा है कि जिन पदों का काम स्थाई प्रकृति का है, वहां पर गेस्ट टीचर्स के रखने की प्रणाली से शिक्षा का स्तर गिरेगा और शिक्षकों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रहेगा। संगठन ने वीसी के इस आदेश को वापस लेने तक हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है।
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दरअसल, 28 अगस्त को वायस चांसलर योगेश कुमार त्यागी के कार्यालय से एक पत्र जारी किया गया था जिसके मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी कालेजों के प्रिंसिपलों को इस तरह का निर्देश जारी किया था। हालांकि, जानकारी मिली है कि कुछ कालेज के प्रिंसिपल ने अपने स्तर पर इस आदेश के बाद भी कुछ ऐड-हॉक नियुक्तियां की हैं।
वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ पर काबिज एबीवीपी ने कहा है कि वे एड-हॉक टीचर्स के साथ खड़े हैं लेकिन परीक्षाओं के बीच इस तरह का फैसला छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ होगा। एबीवीपी नेता आशुतोष सिंह ने कहा कि हड़ताल से बच्चों के भविष्य पर असर पड़ना तय है जिसे रोकने की कोशिश की जानी चाहिए।
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कॉलेजों को एड-हॉक प्रोफेसरों की जगह ‘गेस्ट टीचर्स’ की नियुक्ति करने का निर्देश दिया गया है। इस हड़ताल से दिल्ली विश्वविद्यालय के लाखों छात्रों पर सीधा असर पड़ेगा क्योंकि डीयू में गत 27 नवंबर से ही परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। परीक्षाएं दिसंबर माह के अंत तक चलेंगी। हड़ताल के कारण परीक्षा होने और कापियों के मूल्यांकन में बाधा पड़ेगी।
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रविवार को एक पत्र जारी कर दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने अपने इस फैसले की जानकारी दी। पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निर्णय से 4500 एड-हॉक प्रोफेसर की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है। संगठन ने कहा है कि जिन पदों का काम स्थाई प्रकृति का है, वहां पर गेस्ट टीचर्स के रखने की प्रणाली से शिक्षा का स्तर गिरेगा और शिक्षकों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रहेगा। संगठन ने वीसी के इस आदेश को वापस लेने तक हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है।
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दरअसल, 28 अगस्त को वायस चांसलर योगेश कुमार त्यागी के कार्यालय से एक पत्र जारी किया गया था जिसके मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी कालेजों के प्रिंसिपलों को इस तरह का निर्देश जारी किया था। हालांकि, जानकारी मिली है कि कुछ कालेज के प्रिंसिपल ने अपने स्तर पर इस आदेश के बाद भी कुछ ऐड-हॉक नियुक्तियां की हैं।
वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ पर काबिज एबीवीपी ने कहा है कि वे एड-हॉक टीचर्स के साथ खड़े हैं लेकिन परीक्षाओं के बीच इस तरह का फैसला छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ होगा। एबीवीपी नेता आशुतोष सिंह ने कहा कि हड़ताल से बच्चों के भविष्य पर असर पड़ना तय है जिसे रोकने की कोशिश की जानी चाहिए।