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मां के साथ शिक्षक ने 25 गांवों को बनाया प्लास्टिक मुक्त, राष्ट्रपति ने शिक्षक दिवस पर किया सम्मानित
Fri, 06 Sep 2019 06:50 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Published by: Trainee Trainee
Updated Fri, 06 Sep 2019 06:50 AM IST
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राष्ट्रपति, राजेश कुमार को सम्मानित करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के रेवाड़ी के शिक्षक राजेश कुमार ने अपनी 75 वर्षीय मां बनारसी देवी की मदद से अपने स्कूल और आसपास के 25 गांवों को प्लास्टिक मुफ्त कर दिया। वह बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने के साथ ग्रामीणों को स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ रहे हैं। राजेश दुकानदारों से बचे थान (रनिंग मैटेरियल) का कपड़ा एकत्रित कर अपनी मां को देते और वह उनसे छोटे-बड़े थैले सिलती हैं।
थैले के पीछे हिंदी में स्वच्छ भारत का संदेश होता है। कपड़े के यह थैले ग्रामीणों को मुफ्त में देते हैं, ताकि वह प्लास्टिक, पॉलिथीन का प्रयोग ना करें। स्कूल और समाज को बदलने की इसी सोच के लिए राजेश कुमार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिक्षक दिवस पर नेशनल टीचर अवार्ड 2019 से सम्मानित किया।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से यह सम्मान प्राप्त करने दिल्ली पहुंचे राजेश कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि उन्होंने हिंदी मीडियम से पढ़ाई की है। अब लोग हिंदी मीडियम को तवज्जो नहीं देते और न ही अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में दाखिला दिलवाना चाहते हैं। समाज की इसी सोच को बदलने के लिए उन्होंने अपने खर्चे से स्कूल में हिंदी लैब बनायी है।
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जहां हिंदी की आसान भाषा में सहायक शिक्षण सामग्री तैयार की। स्कूल के शिक्षक और छात्र इसी से हिंदी पढ़ते हैं। रेवाड़ी के मोहनपुर बवाल के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हिंदी के शिक्षक राजेश बताते हैं कि उनके प्रयोग से बच्चों में पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी बढ़ी, यही वजह है कि पिछले 15 साल से स्कूल का रिजल्ट सौ फीसदी है।
2005-06 में यहां 107 छात्र पढ़ते थे, अब उनकी संख्या साढ़े तीन सौ पार कर चुकी है। ईंट-भट्टों में काम करने वाले मजदूरों के 90 बच्चों को उन्होंने अपने प्रयासों से शिक्षा से जोड़ा है।
दो साल तक शौचालय की सफाई
राजेश के मुताबिक, निजी कंपनी की मदद से स्कूल में दो शौचालय बनाए गए थे। लेकिन कुछ समय बाद सफाई कर्मी की मौत हो गई। अब शौचालय की सफाई कैसे की जाए, इसी दुविधा के बीच उन्होंने दो साल के लिए शौचालय गोद ले लिया। प्रतिदिन कक्षा में जाने से पहले दोनों शौचालय की सफाई करते और जरूरत होने पर काम के लिए बीच में भी जाते थे। उनकी इसी सोच ने ग्रामीणों में स्वच्छ भारत का भावना जागृत की।
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थैले के पीछे हिंदी में स्वच्छ भारत का संदेश होता है। कपड़े के यह थैले ग्रामीणों को मुफ्त में देते हैं, ताकि वह प्लास्टिक, पॉलिथीन का प्रयोग ना करें। स्कूल और समाज को बदलने की इसी सोच के लिए राजेश कुमार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिक्षक दिवस पर नेशनल टीचर अवार्ड 2019 से सम्मानित किया।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से यह सम्मान प्राप्त करने दिल्ली पहुंचे राजेश कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि उन्होंने हिंदी मीडियम से पढ़ाई की है। अब लोग हिंदी मीडियम को तवज्जो नहीं देते और न ही अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में दाखिला दिलवाना चाहते हैं। समाज की इसी सोच को बदलने के लिए उन्होंने अपने खर्चे से स्कूल में हिंदी लैब बनायी है।
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जहां हिंदी की आसान भाषा में सहायक शिक्षण सामग्री तैयार की। स्कूल के शिक्षक और छात्र इसी से हिंदी पढ़ते हैं। रेवाड़ी के मोहनपुर बवाल के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हिंदी के शिक्षक राजेश बताते हैं कि उनके प्रयोग से बच्चों में पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी बढ़ी, यही वजह है कि पिछले 15 साल से स्कूल का रिजल्ट सौ फीसदी है।
2005-06 में यहां 107 छात्र पढ़ते थे, अब उनकी संख्या साढ़े तीन सौ पार कर चुकी है। ईंट-भट्टों में काम करने वाले मजदूरों के 90 बच्चों को उन्होंने अपने प्रयासों से शिक्षा से जोड़ा है।
दो साल तक शौचालय की सफाई
राजेश के मुताबिक, निजी कंपनी की मदद से स्कूल में दो शौचालय बनाए गए थे। लेकिन कुछ समय बाद सफाई कर्मी की मौत हो गई। अब शौचालय की सफाई कैसे की जाए, इसी दुविधा के बीच उन्होंने दो साल के लिए शौचालय गोद ले लिया। प्रतिदिन कक्षा में जाने से पहले दोनों शौचालय की सफाई करते और जरूरत होने पर काम के लिए बीच में भी जाते थे। उनकी इसी सोच ने ग्रामीणों में स्वच्छ भारत का भावना जागृत की।